पटना. रालोसपा एनडीए को बाय-बाय करने में मूड में आ गई है। जदयू के दोबारा एनडीए में आने के बाद से ही रालोसपा खुद को असहज महसूस कर रही है। राज्य सरकार पर पार्टी लगातार सवाल उठा रही है। शिक्षा के सवाल पर लगातार अभियान चला रही है। शिक्षा सुधार मानव कतार बनाया गया।
इसमें राजद का साथ मिला। उसके एनडीए को छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने की चर्चा लगातार हो रही है। 13 अक्टूबर को बिहार में बढ़ता अपराध और गिरती कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए धरना देने की घोषणा ने एनडीए से दूरी बढ़ने की चर्चा को और मजबूती दी है।
रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई है। मुजफ्फरपुर में बच्चियों से दुष्कर्म और हत्या के मामले में उन्होंने कहा था कि इस प्रकार की घटना के बाद उनके मुंह से सहसा निकल गया भगवान बिहार को क्या हो गया है। अपराध थम नहीं रहा। कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पद छोड़ कर दूसरे को काम करने का मौका देने का भी अनुरोध किया था।
राजद में शामिल होने का न्योता मिलने से बढ़ा हौसला : इसके पहले पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि और अन्य वरिष्ठ नेता भी राज्य सरकार खासकर मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देते रहे हैं। रालोसपा नेताओं का दावा है कि कोईरी समाज का 7 से 8 प्रतिशत वोट उपेंद्र कुशवाहा के साथ है।
रालोसपा इस रणनीति पर काम कर रही है। एनडीए दरकिनार करे तो महागठंधन में रास्ता खुला रहे। पैगाम-ए-खीर कार्यक्रम के जरिए भी समाज में यादव और कोईरी, अति पिछड़ा और दलित की गोलबंदी का प्रयास शुरू किया है। खुद उपेंद्र कुशवाहा ने खीर बनाने के लिए यदुवंशियों से दूध, कुशवंशियों से चावल, अतिपिछड़ा समाज के पंचमेवा, दलित समाज से तुलसी दल और सवर्ण समाज से चीनी लेने की बात की थी।
मुसलमान भाई के दस्तरखान पर बैठ कर खीर खाने की बात कह कर उपेंद्र कुशवाहा ने सभी वर्ग को साधने की कोशिश के साथ राजद से निकटता का भी संदेश दे दिया था। राजद ने भी उपेंद्र कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया है।