इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज समूह में बड़ी घो’टाले को अंजाम देने में शीर्ष अधिकारियों के साथ ऑडिटर्स भी शामिल हैं। मामले की जांच कर रहे गंभीर धो’खाधड़ी अ’पराध कार्यालय ने खु’लासा किया है कि इन ऑडिटर्स ने अपने कुछ उत्पादों और सेवाओं को बेचने की भी कोशिश की।
एसएफआईओ ने करीब 400 निकायों की पड़ताल और कंप्यूटर व लैपटॉप की जांच के बाद आ’रोप-पत्र दाखिल किया है। इसमें बताया गया है कि समूह में ऑडिट का काम करने वाली कंपनी डिलॉयट, हेसकिंस एंड सेल्स को कर्जदाताओं के साथ हो रही धो’खाधड़ी की जानकारी थी।

जून 2017 की एक मेल से पता चलता है कि ऑडिटर ने डेलॉय की परामर्श इकाई डेलॉय टच तोहमास्तु इंडिया का उत्पाद बेचने की भी कोशिश की थी। समूह के पास कर्ज निगरानी नीति होने के बावजूद इसकी निगरानी नहीं की गई। एसएफआईओ ने मामले की तह तक जाने के लिए आरबीआई से पूरी आंतरिक जांच कराने की मांग की है। जांच एजेंसी ने 30 निकायों को मामले में आ’रोपी बनाया है।

समूह में लंबे समय से चली आ रही फ’र्जीवाडे़ की गतिविधियों के खिलाफ 2017 में एक व्हिसलब्लोअर ने आवाज भी उठाई थी, लेकिन समूह के शीर्ष अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया। कई स्वतंत्र निदेशकों ने इन शि’कायतों को दबाने का भी काम किया और ऑडिट समिति ने भी इस शिकायत को गंभीरता ने नहीं लिया। ला’परवाही का आलम यह था कि मार्च में की गई शिकायत पर दिसंबर में चर्चा की गई।
