भारत ने अपने महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 लूनरक्राफ्ट की पहली तस्वीर आई दुनिया के सामने। इसे 9 जुलाई से लेकर 16 जुलाई के मध्य लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले इसरो चंद्रयान-1 का सफल प्रक्षेपण कर चुका है। इसे 22 अक्तुबर 2008 को लॉन्च किया गया था।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इससे पहले बताया था कि चंद्रयान-2 लूनरक्राफ्ट नासा के एक पैसिव एक्सपेरिमेंटल इंस्ट्रूमेंट को चांद पर ले जाएगा। अमेरिकी एजेंसी इस मॉड्यूल के जरिए धरती और चांद की दूरी को नापने का कार्य करेगी।

विदेशी प्रायोगिक मॉड्यूल के अलावा चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्राज्ञन) है। चंद्रयान-2 इस मिशन में 13 भारतीय पेलोड को लेकर जाएगा जो विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे और चांद की तस्वीरें लेंगे। नासा के मॉड्यूल के बारे में इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने जानकारी दी।
के सिवन ने कहा था कि नासा का लेजर रिफ्लेक्टर अरेज एक प्रायोगिक माड्यूल चंद्रयान-2 के साथ जाएगा। अमेरिकी वैज्ञानिक धरती और चांद के बीच की दूरी को मापने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे। इस यंत्र को लैंडर से अटैच किया जाएगा। यह चंद्रमा की सतह पर लैंडर के स्थान का सटीक उल्लेख करने में सक्षम होगा।
