पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सुक्षाव दिया है कि शिक्षा सुधार योजनाओं में हिंदू मठ, आश्रम, गुरुद्वारा, इस्लामिक ट्रस्ट, बौद्ध और जैन समुदाय को भी शामिल किया जाना चाहिए। इतिहास में भी इन धार्मिक संस्थानों के शिक्षा में बेहतर योगदान का जिक्र है।

इसलिए शिक्षा सुधार योजनाओं में इन धार्मिक संस्थानों को जोड़ना चाहिए। नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट में शिक्षा सुधार योजनाओं पर पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी का मानना है कि अधिकारियों और सरकारों की बंद कमरे में बनने वाली योजनाओं में जब धार्मिक संस्थान भी साथ होंगे तो शिक्षा में ऐसी योजनाएं बनेंगी, जिसके कारण सभी धर्मों के विद्यार्थियों में प्रेमभाव बढ़ेगा और देश का विकास सर्वोपरि होगा।

कमेटी ने शिक्षा सुधार योजनाओं पर विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि बिजनेस और इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन भी बेहद जरूरी होता है। बोर्ड परीक्षा और कॉलेज डिग्री लेने के बाद मार्केट में किस विषय की मांग रहेगी, क्या कोर्स सबसे अच्छा विकल्प है, इसकी जानकारी बिजनेस और इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन से आसानी से उपलब्ध होगी। वे विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने में सहयोग के साथ आर्थिक मदद भी देंगे। इसके अलावा शोधकार्य में भी मदद मिलेगी।
