मुंबई में बीते दिनों हुई भा’री बारिश के कारण हुए अलग अलग हा’दसों में 80 से ज्यादा लोगों की मौ’तों ने प्रकृ’ति के सामने सरकारी इं’तजामों के बौ’ने वजूद की पो’ल खो’ल कर रख दी है। बिहार की राजधानी पटना में तमाम इंत’जाम उस वक्त धरे रह गए जब थोड़ी ही देर की भा”री बारिश से सरकारी अ’स्पताल के वार्ड में मछलियां तै’रती नजर आईं। आधे से ज्यादा भारत में ऐसे ही हा’लात हैं। यह तस्वीरें हैं प्रकृति के उस उस ऑल इंडिया चैलेंज की जो हमारे शहरों और क’स्बों को मिली है।

इन तस्वीरों से एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि हमारे शहर आजादी के वर्षों बाद भी इतने स्मार्ट नहीं हो पाए हैं कि वे इ’कट्ठा होने वाली बारिश के पानी का सामना कर पाएं। आखिर कहां रह गई चू’क, आइये करते हैं इसकी प’ड़ताल. पिछले साल आई विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया भ’र में बा’ढ़ से होने वाली कुल मौ’तों में से 20 फीसद अकेले भारत में होती हैं। रिपोर्ट में यह चे’तावनी दी गई थी कि आने वाले 10 वर्षो में कोलकाता,

मुंबई, ढाका और कराची जैसे दक्षिण एशियाई शहरों में लगभग पांच करोड़ लोगों को बा’ढ़ से नु’कसान के जो’खिम का सामना करना प’ड़ेगा। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रि या केंद्र (एनईआरसी) के मुताबिक, पि’छल्ले साल केरल में आई भ’यानक ‘बाढ़ में 488 से ज्यादा लोग मा’रे ग’ए थे। इस बाढ़ में राज्य के 14 जिलों में करीब 54.11 लाख लोग प्रभा’वित हुए थे। पूरे देश में पि’छल्ले साल बाढ़ और बारिश से होने वाले हा’दसों में 1000 से ज्यादा लोगों की मौ’त हुई थी। ये आं”कड़े विश्व बैंक की ‘चे’तावनी की त’स्दीक करने के लिए काफी हैं।


Input: Jagran