बड़े भाई ने सुनाई छोटे भाई की दर्द भरी कहानी
मृतक दलबीर के बड़े भाई बलबीर ने बताया कि वे जोड़ा फाटक के पास कृष्णा नगर के वार्ड नंबर-24 में रहते हैं। उसके छोटे भाई दलबीर को बचपन से ही रामलीला मंचन का शौक था। वह 8 साल की उम्र में रामलीला में अलग-अलग किरदार निभाने लगा था।
पिछले लगभग 3 साल से वह जोड़ा फाटक पर होने वाली रामलीला में रावण का किरदार कर रहा था। शुक्रवार को हादसे से पहले मंच पर मौजूद मुख्यातिथि ने उन्हें सम्मानित किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया था। वह इसे लेने के बाद अपनी ड्रेस और स्मृति चिन्ह को घर रखने के लिए आया था।
रामलीला से महज 150 मीटर की दूरी पर घर था। रावण दहन से पहले वह ड्रेस और स्मृति चिन्ह रखकर फाटक के रास्ते रामलीला स्थल पर लौट रहा था। तभी रावण दहन शुरू हो गया। इसी दौरान वह ट्रैक पर करने लगा तो डीएमयू ट्रेन आ गई। उसने ट्रेन देख ली थी। वह लोगों को बचाने लगा तो उसका खुद का पैर ट्रेन के नीचे आ गया। इसके बाद उसका सिर ट्रेन से टकराया और फट गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
नेत्रहीन पिता ने भी इसी ट्रैक पर तोड़ा था दम
दलबीर के पिता स्वर्ण सिंह की 10 साल पहले इसी ट्रैक पर मौत हुई थी। बलबीर का कहना है कि उसके पिता नेत्रहीन थे और एक दिन ट्रैक से गुजर रहे थे। तभी स्वर्ण शताब्दी की चपेट में आने से उनकी मौत हुई थी। उन्हें क्या पता था कि पिता के बाद अब भाई की भी इसी ट्रैक पर मौत होगी।
डेढ़ साल पहले हुई थी मृतक दलबीर की शादी
दलबीर की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। उसके 8 महीने की बच्ची भी है। दलबीर और बलबीर घर में पतंग बनाने का कम करते थे। घर की पहली मंजिल पर दोनों भाई रहते हैं, जबकि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर पतंग बनाने का काम करते थे। इस हादसे के बाद से परिवार में मातम छाया है। दलबीर का पोस्टमॉर्टम हो गया है। परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।