अब राज्य सरकारों के नियम के अनुसार तय होगी सीबीएसई स्कूलों की फीस

NEW DELHI : स्कूलों में बढती फीस हमेशा से पैरेंट्स के लिए एक बड़ी परेशानी रहीं है. वहीं इसी के चलते कई बच्चों को अच्छे स्कूलो में नामांकन नहीं मिल पाता है. लेकिन अब फीस को लेकर सेन्ट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने अब इससे मान्यता प्राप्त स्कूलों की फीस को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार तय करने की बात कही है. यानि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल अब अपनी मर्जी से फीस में बढ़तोत्तरी नहीं कर सकेंगे. इन स्कूलों की फीस राज्य सरकार की ओर से स्कूल शुल्क को लेकर बनाए गए अधिनियम और विनियम के अनुसार हीं होंगी. इस बारे में तेलंगना टूडे में एक रिपोर्ट छपी है.

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जानकारी के अनुसार हाल हीं में सीबीएसई ने अपने एफिलिएशन संसोधन के नियम लागू किए हैं. एक दैनिक में छपी ख़बर के अनुसार अपने revamped affiliation bye-laws के अनुसार सीबीएसई ने कहा है कि फीस के संबद्ध में उप-कानूनों में सुधार किया है. जिसके अनुसार बोर्ड ने यह साफ तौर पर कहा है कि राज्यों में शुल्क विनियमन के संबंध में अधिनियमित/ तैयार केंद्रीय और राज्य/ संघ राज्य सरकारों के अधिनियम और विनियम ही सीबीएसई-संबद्ध स्कूलों में भी लागू होंगे.

आपको बता दे कि इससे पहले सीबीएसई-संबद्ध स्कूलों को अजादी थी की वे अपने स्कुल की फीस राज्य सरकारों की फीस विनियमन के ही अनुसार तय नहीं करे. लेकिन इस नए उप—कानूनों ने सीबीएसई-संबद्ध स्कूलों में राज्य सरकार द्वारा स्कूल शुल्क विनियमन के सीबीएसई स्कूलों में पूर्ण रुप से लागू करने का मार्ग खेल दिया है. हालांकि आपको बता दे कि, ये स्कूल सरकार के निर्धारित कानूनों, विनियमों और दिशा—निर्देशों के अनुसार अपने स्कूल में शिक्षण शुल्क संशोधित कर सकते हैं.

बोर्ड के द्वारा संशोधित उप-कानूनों पर अगर गौर करें तो किसी समाज या ट्रस्ट द्वारा संचालित कोई भी स्कूल प्रवेश शुल्क के लिए डोनेशन नहीं ले सकता है या स्वीकार भी नहीं करेगा. वहीं प्रवेश शुल्क राज्य शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार ही लिया जाना चाहिए. वहीं बोर्ड के इस नियम को फॉलो नहीं करने पर या नियमों के उल्लंघन पर “उच्च माध्यमिक स्तर” से लेकर “माध्यमिक स्तर” के स्कूल पर डाउनग्रेड करने के साथ-साथ 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगेगा.


वहीं बोर्ड की माने तो इन नए उप-कानूनों के उल्लंघन होने पर निलंबन और यहां तक कि स्कूलो की मान्यता भी रद्द हो सकेगी. जबकि वैसे स्कूल जो बोर्डिंग परीक्षा में छात्रों स्पॉन्सर करने में गड़बड़ी करते हैं वैसे स्कूलों के छात्रों को भी बोर्ड परीक्षा में बैठने से दो साल के लिए वंचित कर दिया जाएगा।

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