MUZAFFARPUR : 111वीं शहादत दिवस पर याद किये गये शहीद खुदीराम बोस, पूरी हुई उनकी अंतिम इच्छा

MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : शहीद खुदीराम बोस का 111वां शहादत दिवस केंद्रीय कारा के फांसी स्थल पर सम्मानपूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर नगर आवास व विकास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, प्रमंडलीय आयुक्त नर्मदेश्वर लाल, डीआईजी रविन्द्र कुमार, जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष, उपविकास आयुक्त उज्जवल कुमार, सएसपी मनोज कुमार, सिटी एसपी नीरज कुमार सिंह, जेल अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा, जेलर ए के मौर्य, एसडीओ कुंदन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक नगर मुकुल कुमार रंजन, पुलिस उपाधीक्षक पूर्वी गौरव कुमार पाण्डेय और मिदनापुर से आये लगभग डेढ़ दर्जन अतिथियों सहित कई गणमान्यों ने पुष्प और माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.

देश की आजादी के लिए कम उम्र में अपने प्राण त्यागने वाले देशभक्तों में खुदीराम बोस का नाम भी शामिल है. जिस उम्र में बच्चे खेलने, घूमने-फिरने और पढ़ाई के बारे में सोचते हैं उस उम्र में इनके अंदर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा था. मात्र 18 वर्ष की आयु में यह युवा क्रांतिकारी हाथ में गीता लेकर फांसी के फंदे पर लटक गया था.

खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के बहुवैनी नामक गांव में बाबू त्रैलोक्यनाथ बोस के यहां हुआ था. उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था. नौंवी कक्षा के बाद खुदीराम ने पढ़ाई छोड़ दी और देश को आजादी दिलाने के आंदोलन में शामिल हो गए.

शहीद खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर रविवार की अहले सुबह सेंट्रल जेल स्थित फांसी स्थल पर अधिकारी व आमजनों ने माल्यार्पण किया और उनकी शहादत दिवस को याद करते हुये दो मिनट को मौन रखा.

वहीं शहादत की पूर्व संध्या पर मिदनापुर से आये शहीद खुदीराम बोस की बहन नपरुपा देवी के पोते सुब्रतो राॅय और उनकी पत्नी ममता राॅय, व झरना आचार्य, प्रकाश हलधर समेत 16 सदस्यीय दल ने शहीद दिवस के दिन फांसी स्थल को आमलोगों के दर्शन हेतु खुला रखने की मांग की ताकि आमलोग शहीद के फांसी स्थल के आसानी से दर्शन कर सके. कार्यक्रम के दौरान मिदनापुर से आये सुब्रतो राॅय, उनकी पत्नी मता राॅय समेत सभी की आँखे नम हो गई.

कार्यक्रम के बाद अमर शहीद की जन्मभूमि मिदनापुर से लाई गई मिट्टी व काली मां का चरणामृत को फांसी स्थल और चिताभूमि पर समर्पित किया गया और वहां मिट्टी रखकर चंदन व अमलताश के पौधे लगाए गये.

जेल में उनके फांसी स्थल के समीप मंत्री सुरेश कुमार शर्मा समेत प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम, डीआईजी, एसएसपी समेत अन्य अधिकारियों ने चंदन का पौधा लगाया और वृक्षारोपण किया, वहीं चिताभूमि पर भी अमलतास का पौधारोपण किया गया.

इस दौरान जेल में शहीद खुदीराम बोस की प्रतिमा का मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने अनावरण किया और उपस्थित तमाम अधिकारियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

कार्यक्रम के उपरांत सुबह 8 बजे सोडा गोदाम चौक स्थित चिताभूमि पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शहीद की वीरता को याद करते हुये माल्यार्पण किया गया वहीं 10 बजे खुदीराम बोस स्मारक स्थल पर शहीद खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया व उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला गया और उनकी वीरता की गाथा को याद किया गया. सोडा गोदाम स्थित चिताभूमि को शहीद स्मारक स्थल व पार्क बनाने को लेकर जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है.


शहीद की जीवनी पर पुस्तक लिख रहे अरिंदम भौमिक ने बताया कि खुदीराम जब मुजफ्फरपुर जेल में थे तो उन्होंने पत्र के माध्यम से अपने ग्रामीण अमृत बाबू को सूचना भेज कर अपनी अंतिम इच्छा बतायी थी.

शहीद खुदीराम बोस की पहली इच्छा यह थी कि एक बार अपने जन्मस्थान मिदनापुर को देखना चाहते हैं. वहां की मिट्टी को स्पर्श करना चाहते हैं, दूसरी इच्छा दीदी नपरुपा देवी और भतीजा ललित से मिलना चाहते हैं. तीसरी इच्छा थी कि भतीजी शिवरानी की शादी के बारे में जानना चाहते हैं. चौथी और अंतिम इच्छा थी कि सिद्धेश्वरी कालीमाता मंदिर का चरणामृत पीना चाहते हैं.

अरिंदम ने बताया कि शहीद की इच्छाएं पूरी नहीं हो सकीं. 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी दे दी गई. उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के मकसद के लिए वे मुजफ्फरपुर आए हैं. जन्मस्थान मिदनापुर से मिट्टी, शहीद की दीदी और भतीजे ललित की फोटो व सिद्धेश्वरी काली माता मंदिर का चरणामृत भी साथ लाए थें. जिसे रविवार की सुबह सेंट्रल जेल स्थित शहीद के फांसी स्थल के पास अर्पित किया गया और चंदन व अमलताश के पोधे लगाये गये.

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