#Bihar #Unnav पुलिया के नीचे वो सि’कुड़ी-सी बैठी थी. खुद को समे’टे हुए. एक झीने से दुपट्टे से ख़ुद को ढकने की कोशिश करती हुई. उसके पास में ही खाने का डिब्बा खुलकर बि’खरा पड़ा था. उसके कपड़े मिट्टी में सने हुए. पास में उसकी चप्पलें उ’ल्टी पड़ी थीं. इतनी चो’ट थी देह पर… कुछ भी भूला नहीं है. मां के लिए आसान थोड़े होता है अपनी बेटी को ऐसे देखना.”

एक रे’प पी’ड़िता की मां बताती है कि उनकी स्कूल जाने वाली बेटी के साथ चार बार क’थित तौर पर रे’प हुआ. पहली बार जब वो लगभग दस साल की थीं, उसके बाद तीन बार और.
वे बताती हैं कि रे’प करने वाला उनके गांव का ही एक लड़का था. जो पहले उनकी बेटी को स्कूल के रास्ते में आते-जाते तं’ग किया करता था. एक दिन जब पति-पत्नी दोनों काम से घर से बाहर थे, उसने घर में घु’सकर उनकी बेटी का ब’लात्कार किया.फिर एक बार खेत में, एक बार पुलिया के पास और एक बार और… बेटी के साथ हुई रे’प की ये अलग-अलग घ’टनाएं कविता के लिए कभी ना भूलने वाला द’र्द है.
वो बताती हैं कि उनकी बेटी ने तीन बार आत्मह’त्या करने की भी कोशिश की.


Input: BBC Hindi