#PATNA #BIHAR #INDIA : पिछले माह ही पटना के यारपुर मलिन बस्ती में झोपड़ी पर दीवार गिरने से तीन बच्चों की जा’न चली गई थी। बावजूद इसके नगर निगम नहीं चेत रहा है। राजधानी के तमाम मलिन बस्तियों में अब भी ख’तरा मंडरा रहा है। जर्जर झोपड़ियां कभी भी हा’दसे का कारण बन सकती हैं। इन्हीं बस्तियों में खुले मैनहोल भी हैं, जो पलक झपकते ही बच्चों की जिंदगी ख’त्म करने के लिए काफी हैं। खास बात यह है कि नगर निगम के सर्वे में भी ख’तरे की बात कही गई है, परंतु कहीं भी किसी तरह के उपाय नहीं किए जा रहे हैं।

ऐसे ही दो मलिन बस्तियों की पड़ताल की तो खौ’फ की सच्चाई सामने आई। मंदिरी नाले के किनारे बसी आबादी हो या छज्जूबाग की मलिन बस्ती। ये लोग पल-पल ख’तरे के साए में जी रहे हैं। यहां के हालात देखकर ऐसा लगता है कि सरकारी मशीनरी अनहोनी के इंतजार में है। सबकुछ सामने है, फिर भी गंभी’रता से नहीं लिया जा रहा है।

छज्जूबाग मलिन बस्ती में लगा हैंडपंप करीब चार वर्षों से ख’राब पड़ा है। पानी तक के लिए यहां के लोग त’रसते हैं। मैनहोल भी खुला हुआ है, आसपास कोई स्कूल भी नहीं है। इसलिए बच्चे पढ़ भी नहीं पते। आबादी के हिसाब से शौचालय नहीं है। शौचालय के लिए पहले दो रुपए चुकाने पड़ते थे। अब पांच रुपए वसूले जाते हैं। गरीब के लिए यह रकम कम नहीं है। आवास तो सबसे बड़ी स’मस्या है। लोग झोपड़ी बनाकर रहते हैं। जैसे-तैसे इसकी व्यवस्था हो पाती है। इसमें रहना ख’तरनाक भी होता है परंतु मजबूरी है। आसपास कोई स्कूल नहीं है न ही आंगनबाड़ी केंद्र है। दिनभर बच्चे यूं ही घूमते रहते हैं, इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।