माँ ने अपने बच्चे को बचाने के लिए खुद की दे दी जा’न, पलक झपकते छोर गयी दुनिया। देखें…

#UTTARAKHAND #INDIA : घूमने के लिये कार्बेट पार्क पहुंचा दिल्ली का गर्ग और केडिया परिवार कार हा’दसे के बाद उन्हें कभी न भूल पाने वाला ज’ख्म दे गया। धनगढ़ी नाले में कार के समाते ही परिवारों की खुशियां मा’तम में बदल गई। अपने लाडले को बचाने के लिये शिखा ने जान गंवा दी, जबकि एक दंपति लापता है।

रविवार को 795, शास्त्री नगर, दिल्ली निवासी सुधीर गर्ग अपनी पत्नी शिखा गर्ग, बेटे अर्पित और साडू भाई विकास केडिया, उनकी पत्नी रचना केडिया, बेटी सुहानी, वान्या के साथ मरचूला सलोना रिजॉर्ट में जा रहे थे। सभी रिजॉर्ट में पहुंचकर आराम करना चाहते थे। रास्ते में रिजॉर्ट की दूरी कम होने की बात कहकर सभी ने चालक से तेज चलने की बात कही। इसी दौरान चालक सोनू ने उफनाते धनगढ़ी नाले में इनोवा कार डाल दी। पलक झपकते ही कार नाले में समा गई।

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नाले में कार बहते देख आसपास के लोगों ने प्रशासन को जानकारी देने के साथ खुद बचाव कार्य शुरू कर दिया। करीब आधा घंटे बाद नाले से सुधीर, अर्पित, सुहानी, वान्य, सोनू को सुरक्षित निकाला गया, जबकि शिखा गर्ग की मौ’त हो गई। विकास और उनकी पत्नी रचना पानी के तेज बहाव में ओझल हो गयी। देर शाम दमकल विभाग और पुलिस के सर्च अभियान चलाने के बाद भी पति-पत्नी का पता नहीं चल सका। शिखा के बेटे अर्पित ने बताया कि यह हा’दसा वह कभी नहीं भूल सकता। मां उन्हें बचाने के लिये कार के अंदर से ही सिर पानी से बाहर निकालती रही। वह लोगों से मुझे बचाने की गुहा’र लगाती रही, लेकिन काफी देर बाद वह खुद पानी में समां गई।

धनगढ़ी नाले में पर्यटकों की कार डूबने के बाद हर कोई स्तब्ध था। अस्पताल में श’व पहुंचते ही लोग पर्यटकों का हाल जानने के लिये पहुंचने लगे, जहां मृत’का शिखा के पति सुधीर लोगों को बोल रहे थे कि हम यहां मौ’त हो गले लगाने आए। काश न आते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। इधर, शिखा के श’व को अस्पताल में देखकर परिजनों में को’हराम मच गया। बेटा अर्पित मां को उठाने का प्रयास करते रहा। परिजनों के समझाने के बावजूद अर्पित एकटक होकर मां को देखता रहा।

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कोतवाल रवि कुमार सैनी ने बताया कि दमकल विभाग और पुलिस ने देर शाम तक पति-पत्नी को ढूंढने के लिये सर्च अभियान चलाया। अब अंधेरा होने के बाद सोमवार को सर्च अभियान चलाया जाएगा। वहीं नाले में फंसी कार को ग्रामीणों की मदद से देर शाम ही बाहर निकाला गया।

कॉर्बेट से सटा धनगढ़ी नाला का’ल बनकर बहता है। पिछले साल अगस्त में भी दिल्ली के एक परिवार के तीन लोगों को यहां अपनी जा’न गंवानी पड़ी। कुमाऊं और गढ़वाल की लाइफ लाइन के बाद भी इस नाले में पुल बनाने के प्रयास अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। धनगढ़ी नाले में दो की मौ’त के बाद डीआईजी जगतराम जोशी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृ’तकों के परिजनों को ढांढस बधाया। साथ ही पुलिस और प्रशासन से इस तरह के हादसे रोकने के लिये जागरूक करने को कहा। इस दौरान एसएसपी सुनील कुमार मीणा भी मौजूद रहे।

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