#ARRAH #BIHAR #INDIA : बिहार के चर्चित आरा कोर्ट बम ब्ला’स्ट में मंगलवार को कोर्ट ने दो’षियों को स’जा सुना दी। बम धमा’के के मुख्य आ’रोपित कुख्यात लंबू शर्मा को फां:सी की स’जा दी गयी है। वहीं अखिलेश उपाध्याय, चांद मियां व उसके भाई नईम मियां सहित सात आ’रोपितों को उम्र कै’द की स’जा सुनायी गयी है।

तृतीय अपर जिला व सत्र न्यायाधीश त्रिभुवनयादव ने दोपहर करीब तीन बजे खचाखच भरी अदालत में स’जा सुनायी। एपीपी प्रशांत ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्य आ’रोपित लंबू शर्मा को ह’त्या, ह’त्या का प्रयास, सरकारी काम में बाधा, सजायाफ्ता होने के बाद कस्टडी व उ’म्रकैद के बावजूद उसी तरह के गंभीर अ’पराध करने में दो’षी पाया गया था। उस आधार पर कोर्ट ने उसे फां’सी की स’जा सुनायी है।

इसके पहले सभी आठों आ’रोपितों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया था। इस मामले में कोर्ट ने तीन साल तक चले ट्रायल के बाद शनिवार को आठों आ’रोपितों को दो’षी पाया था।
23 जनवरी 2015 को आरा सिविल कोर्ट में बम ब्ला’स्ट हुआ था। उसमें बम लेकर यूपी की महिला नगीना देवी की मौ’त हो गई थी। कोर्ट हाजत की सुरक्षा में तैनात सिपाही अमित कुमार भी श’हीद हो गया था। करीब 20 लोग ज’ख्मी हो गए थे। ध’माके के बीच पेशी के लिए कोर्ट पहुंचे लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय भाग निकले थे।

इस मामले में पीरो के रहने वाले कुख्यात लंबू शर्मा व नोनार गांव के अखिलेश उपाध्याय सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के क्रम में चांद मियां, नईम मिया व प्रमोद सिंह सहित अन्य के नाम आये थे। बाद में जांच यूपी के डॉन ब्रजेश सिंह, यूपी के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी और पीरो के पूर्व विधायक सुनील पांडेय तक भी पहुंची थी। इस मामले में सुनील पांडेय को जे’ल भी जाना पड़ा था। ब्रजेश सिंह की भी आरा कोर्ट में पेशी हुई थी लेकिन साक्ष्य के अभाव में पुलिस उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की। मुख्तार अंसारी के खिलाफ भी पुलिस को कोई साक्ष्य नहीं मिला था।