श’र्मनाक: 9 साल की बच्ची के इलाज़ के लिए गि’ड़गिड़ाते रही माँ, डॉक्टरों ने नही किया भर्ती तो बच्ची ने तोड़ा दम..

#UP #INDIA : द्वापर की लीला एक बार फिर कलयुग में घटी। कंस ने देवकी की गोद से योगमाया को छीनकर प’टककर मा’र दिया था, ठीक उसी वक्त पर कलयुग में एसएन की इमरजेंसी में व्यवस्था रूपी कंस ने नौ साल की योगमाया रूपी बालिका की जान ले ली। बीस दिन तक अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी डाक्टरों ने मासूम बालिका को एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाया। बाद में बालिका को एसएन की इमरजेंसी लाए तो उसे भर्ती ही नहीं किया गया। मेडिकल कालेज की चारदीवारी में उपचार के अभाव में बेटी ने मां की गोद में दम तो’ड़ दिया।

बाह निवासी रामवीर ने एसएन मेडिकल कालेज के गेट पर द’हाड़ें मारते हुए बताया कि वह गुरुवार रात करीब 8:30 बजे गंभी’र हालत में बेटी को लेकर इमरजेंसी पहुंचा। आ’रोप है कि यहां डॉक्टरों ने बच्ची को भर्ती नहीं किया। उसने हाथ पैर भी जोड़े, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। करीब डेढ़ घंटे तक मां की गोद में बेटी तड़पती रही। रात करीब पौने दस बजे मासूम बेटी ने इलाज के अभाव में द’म तोड़ दिया। मां-बाप बेटी के श’व को गोद में रखकर द’हाड़ें मारते रहे, और आखिर में बेटी के श’व को लेकर वापस बाह चले गए।

बाह क्षेत्र के गांव जरार निवासी रामवीर की नौ साल की बेटी अंजू को 20 दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। रामवीर बेटी को लेकर बाह सीएचसी गया। जहां उसे रेबीज इंजेक्शन न होने पर वापस भेज दिया गया। इसके बाद वह लगातार सीएचसी के चक्कर काटता रहा, लेकिन बच्ची को रेबीज इंजेक्शन मुहैया नहीं हो सका। डाक्टर रामवीर को कहते रहे कि इंजेक्शन खत्म हो गया है। शुक्रवार को बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। रामवीर और मां श्रीमति उसे लेकर फिर बाह सीएचसी पहुंचे। आ’रोप है कि वहां दो घंटे डॉक्टर सीट पर ही नहीं मिले। बाद में आते ही बच्ची को एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी के लिए रैफर कर दिया

एसएन मेडिकल कालेज स्थित इमरजेंसी में नौ साल की बच्ची की जान बचाने के लिए मां और पिता इधर से उधर उसे लेकर घूमते रहे। ज्यादा गि’ड़गिड़ाने पर किसी को दया तो नहीं अलबत्ता वहां किसी चिकित्सक ने उससे कहा कि जब इलाज नहीं करा पाते तो बच्चे पैदा क्यों करते हो? संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बयां करती इस घट’ना को इमरजेंसी में जिसने भी देखा उसकी आंखें भीग गईं।

एसएन मेडिकल कालेज में असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा और अव्यवस्थाओं का यह हाल तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री दो साल के कार्यकाल में दो बार, दोनों उपमुख्यमंत्री भी तीन से चार बार और स्वास्थ्य विभाग के तमाम आला अफसरों का आए दिन इस मेडिकल कालेज में दौरा होता है।

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