अद्भुत: 69 सालों से किराये के 2 कमरों में चल रहा ये माध्यमिक विद्यालय, देखें..

#PATNA #BIHAR #INDIA: राजधानी पटना में 69 सालों से दो कमरों में एक माध्यमिक विद्यालय चल रहा है। इसका नाम मॉडर्न माध्यमिक विद्यालय है। इसकी स्थापना 1950 में हुई थी। जब इसकी स्थापना हुई थी, उस वक्त यह बिहार-झारखंड का इकलौता शाम के शिफ्ट में चलने वाला विद्यालय था। अब भी बिहार में शाम के शिफ्ट में चलने वाला इकलौता विद्यालय है। विद्यालय वर्तमान में पीएन एंग्लो उच्च विद्यालय नया टोला में चल रहा है।

इस विद्यालय की स्थापना वैसे छात्र-छात्राओं के लिए की गई थी, जो दिन में किसी कारण बस पढ़ाई नहीं कर पाते थे। पहले प्राइवेट स्कूल का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। इस वजह से बच्चे दाखिले से वंचित नहीं रह जाएं। इस वजह से स्कूल की स्थापना की गई थी। पहले छठी से दसवीं तक की पढ़ाई होती थी। वहीं, इसके अलावा रोजगार या किसी तरह के काम की वजह से सुबह में आने में असमर्थ बच्चों के लिए सेकेंड शिफ्ट में स्कूल खोला गया था। इनके लिए उस वक्त की सोच के साथ विद्यालय खोला गया था। गरीब मेधावी छात्र किसी तरह से शिक्षा से वंचित न रह जाएं। इसी उद्देश्य के साथ यह खोला गया था पर यह उद्देश्य अब खत्म होता दिख रहा है। अब सिर्फ नौवीं और दसवीं की पढ़ाई होती है। मुश्किल से 40 छात्र हैं। सरकार इतने पुराने स्कूल को अभी तक भवन बनाने में मदद नहीं कर रही है जबकि हजारों स्कूलों को उत्क्रमित करके माध्यमिक और उच्च माध्यमिक में तब्दील कर दिया गया।

नाम है मॉडर्न माध्यमिक विद्यालय
– बिहार और झारखंड का इकलौता स्कूल, जिसमें शाम के शिफ्ट में होती है पढ़ाई
– यह स्कूल वैसे बच्चों के लिए खोला गया था, जो दिन में काम करे और रात में उन्हें पढ़ने का मौका मिले
– रात्रि में बिजली कटने पर होती हैं दिक्कतें, दूसरे स्कूल वाले नहीं लगाने देते हैं इनवर्टर
– सरकार की उदासीनता से अपने उद्देश्य की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहे हैं स्कूल

सरकार के उदासीन रवैये की वजह से आज तक इस स्कूल का अपना भवन नहीं बन सका। यह विद्यालय आज तक दूसरे स्कूल के दो कमरों में चल रहा है। इस स्कूल के अपने भवन के लिए कई बार पत्राचार हुआ। सरकार के पास कई बार मामला गया पर आज तक इसकी सुध नहीं ली गई। कई बार विधानसभा में प्रश्न पूछे गये पर नतीजा कुछ नहीं निकला।

विद्यालय को अपना भवन के लिए कई बार लिखा गया है पर आज तक भवन को लेकर कुछ सार्थक पहल नहीं हो सकी है। अपना वर्ग कक्ष नहीं होने की वजह से छात्रों की संख्या बहुत कम है। दो कमरों में किसी तरह से क्लास चल रही है।

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