पटना. बिहार की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना डागमारा का चैप्टर क्लोज नहीं होगा। परियोजना के डीपीआर पर फिर से काम होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष बुधवार को डागमारा परियोजना को लेकर प्रजेंटेशन दिया गया। इसमें इस परियोजना को पूरी तरह उपयोगी और व्यावहारिक बताया गया। इसमें परियोजना की लागत भी 2600 करोड़ से घटकर 1600 करोड़ होने की संभावना व्यक्त की गई है।
यही नहीं इससे उत्पादित बिजली की दर भी चार रुपए प्रति यूनिट के आस-पास होने की उम्मीद है। पहले यह 7-8 रुपए के आस-पास थी। इसके लिए जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस परियोजना से 130 मेगावाट बिजली पैदा होनी है। परियोजना वर्ष 2006-07 से ही विभिन्न स्तरों पर अटकी पड़ी है
कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में 22.5 किलोमीटर पर वीरपुर (सुपौल) व कुरसेला (कटिहार) के बीच 126 मेगावाट पनबिजली की क्षमता का पता चला। इसके बाद राज्य सरकार ने इसके निर्माण की योजना पर काम शुरू किया है।
सर्वे व तकनीकी पहलू की जांच के बाद सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ इरिगेशन एंड पावर के चेयरमेन डॉ. कंवरसेन ने परियोजना की रूपरेखा तैयार की।
इसी के आधार पर बिहार स्टेट हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ने वर्ष 2005-06 में इस पर काम शुरू किया। वर्ष 2006-07 में इसे प्रारंभिक स्वीकृति भी मिल गई।
वैपकॉस द्वारा परियोजना का डीपीआर तैयार करवाकर केन्द्र के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। बाद में नेपाल से अनुमति नहीं लेने का तर्क देकर इसका स्थल बदला। {नए डीपीआर के अनुसार परियोजना स्थल इंडो-नेपाल सीमा से 30-31 किमी दूर। क्षमता भी बढ़कर 130 मेगावाट कर दी। लेकिन परियोजना में कई तरह की समस्याएं आने लगी।
प्रजेंटेशन देखने के बाद सीएम ने दिया आदेश : कभी नक्शे को लेकर तो कभी इसके स्थान को लेकर विवाद खड़ा होता रहा। परियोजना का डीपीआर भारत सरकार की एजेंसी वैपकॉस ने तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने परियोजना को लेकर आगे की कार्रवाई करने को कहा है। सीएम के साथ बैठक में उर्जा मंत्री विजेंद्र यादव व ऊर्जा विभाग के सीएमडी प्रत्यय अमृत भी शामिल थे।