#PATNA #BIHAR #INDIA : सं’गीन आ’रोपों में नि’लंबित दारोगा विक्रमादित्य झा को बचाने का खेल पटना पुलिस लाइन से खेला गया। दरअसल इसी वर्ष बीते सात जुलाई को दारोगा को स’स्पेंड किया गया था।

एसएसपी गरिमा मलिक ने इसके आदेश दे दिये, लेकिन पुलिस लाइन से विक्रमादित्य झा के निलंबन की चिट्ठी बाढ़ भेजी ही नहीं। बीच में ही चिट्ठी को रोक लिया गया। उस वक्त पुलिस लाइन के डीएसपी श्याम सुंदर प्रसाद कश्यप थे जो फिलहाल आरा में पदस्थापित हैं। सोमवार को जब विक्रमादित्य झा की विधायक अनंत सिंह को कोर्ट में पेशी करवाने की तस्वीर वायरल हुई तब पुलिस महकमे की नींद खुली। पुलिस लाइन के नये डीएसपी आशीष सिंह को जैसे ही इस बारे में पता चला उन्होंने तुरंत चिट्ठी को बाढ़ भेजने के निर्देश दिये। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता द्वारा दिल्ली महिला मिथिलेश सिंह पर दर्ज कराए गए फर्जी केस का आईओ विक्रमादित्य झा ही था। आ’रोप है कि उसने कोतवाली थाने की स्टेशन डायरी में भी हेरफेर की थी।

महकमा भी दारोगा का पूरा साथ दे रहा है। पुलिस के बड़े अधिकारी नियम-कानून का हवाला देकर फिलहाल दारोगा के खिलाफ जांच करने और उन्हें तुरंत गि’रफ्तार नहीं करने की बात कह रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि निलंबन अवधि में दारोगा आराम से ड्यूटी बजाता रहा और अफसरों ने उसे टोका तक नहीं।

वहीं, दिल्ली की महिला मिथिलेश सिंह का आ’रोप है कि जब उन्हें पुलिस ने गि’रफ्तार किया था तो ये सारे नियम-कानून कहां चले गये थे? गलत केस में फंसाने और जांच करने वालों का साथ देने वाले बिहार पुलिस के कुछ बड़े अफसरों को लेकर भी मिथिलेश सिंह ने सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने कहा कि जब उन पर कोतवाली थाने में फर्जी केस कर दिल्ली से गिरफ्तार किया जा सकता है तो उन्हें फंसाने वालों पर कार्रवाई में देर क्यों हो रही है।



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