#MAHARASHTRA : भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के लिए आज बैठक

#MAHARASHRTA #INDIA : महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के लिए बुधवार यानी आज मुंबई में पार्टी की बैठक होनी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है। इस बैठक के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी राज्य में मौजूद रहेंगे। वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और अमित शाह की मुलाकात की अटकलें लगाई जा रही हैं। वर्तमान में सदन के नेता फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि वह अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे।गौरतलब है कि राज्य में सरकार बनाने के समीकरण को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान चल रही है। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी के उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना को महाराष्ट्र विधायक दल की बैठक के लिए मंगलवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक नामित किया है।

महाराष्ट्र में ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़ी शिवसेना को साधने के लिए भाजपा अब एक नए फार्मूले पर विचार कर रही है। इसके तहत राज्य में उपमुख्यमंत्री पद के साथ केंद्र सरकार में शिवसेना को दो और मंत्री पद दिए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि दोनों दलों के ताजा बयानों से बढ़ी तल्खी के चलते सरकार के गठन में देरी हो सकती है।भाजपा-शिवसेना की ओर से मंगलवार को दिनभर बयानबाजी होती रही। पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने बयान जारी कर शिवसेना के 50-50 के फार्मूले के दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद शिवसेना ने सरकार के गठन को लेकर शाम को भाजपा के साथ होने वाली बैठक रद्द कर दी। महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे आने के पांच दिन बाद भी भाजपा-शिवसेना सरकार गठन के लिए एक टेबल पर आने में कामयाब नहीं हो सके हैं। शिवसेना लगातार भाजपा पर दबाब बनाए हुए और शुरुआत में संयम बरतने के बाद अब भाजपा भी खुलकर मैदान में आ गई है।

केंद्र व राज्य में हिस्सेदारी बढ़ाने पर मंथन
शिवसेना को साधने के लिए भाजपा राज्य व केंद्र में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की पेशकश कर सकती है। माना जा रहा है कि केंद्र में मंत्रिमंडल का विस्तार कर शिवसेना को दो मंत्री पद दिए जा सकते हैं। साथ ही राज्य में उपमुख्यमंत्री के अलावा सरकार में 40 फीसदी की हिस्सेदारी की पेशकश भी की जा सकती है। इसे भाजपा का सबसे बड़ा समझौता फार्मूला माना जा रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा के अंकगणित में एनसीपी और कांग्रेस भी अहम भूमिका में हैं। शिवसेना के पास दो ही विकल्प हैं। या तो वह भाजपा के साथ सरकार बनाए या फिर एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर नया विकल्प खड़ा करे। भाजपा के पास भी शिवसेना के दूर होने पर एनसीपी का सबसे बड़ा विकल्प है।

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