#BIHAR #INDIA : शहर का वायु प्रदूषण कैसे कम होगा? इसके ख’तरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद भी पटना में खुले में कचरा जलाया जा रहा है। साथ ही बिना ढंके हुए भवन निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। सड़कों पर ही निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। इसके अलावा सड़कों की सफाई नियमित रूप से नहीं होने से वातावरण में धूल कण बढ़ गए हैं। पानी का छिड़काव भी प्रमुख सड़कों तक ही सीमित है। बुधवार शाम को स्टेशन क्षेत्र में बकरी बाजार के पास कचरा जलाया गया। इससे इलाके में काला धुआं फैल गया। यहीं पर नगर निगम का कचरा संग्रहण केंद्र भी है। यहां से गाड़ियां खुले में कचरा लेकर बैरिया डंपिंग यार्ड तक जाती रहीं। दानापुर समेत कई जगह खुले में कचरा जलता मिला। बाइपास किनारे पड़े कचरे में आए दिन आग लगा दी जा रही है।

बुधवार को दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित रहा पटना
बुधवार को भी पटना की हवा दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित रही। हालांकि वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी आयी है। पटना का वायु गुणवत्ता सूचकांक 317 पाया गया है। वहीं मुजफ्फरपुर 284 और गया का 232 सूचकांक रहा। दिल्ली का सूचकांक घटकर 214 आ गया है। पटना का वायु प्रदूषण मंगलवार को खतरनाक श्रेणी में था लेकिन पिछले 24 घंटे में घटकर बहुत खराब श्रेणी में पहुंचा है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक पटना, मुजफ्फरपुर और गया का वायु प्रदूषण दिल्ली से ज्यादा है।

धुआं छोड़ते वाहनों से बढ़ गई है परेशानी
शहर में धुआं उगलते वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। बुधवार को भी कई वाहनों को जब्त किया गया। एक दिन बाद ऐसे वाहनों पर रोक लगेगी। पटना का वायु प्रदूषण बढ़ाने में इन वाहनों का भी बड़ा योगदान है। बता दें कि कई बार इस पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिल सकी है।

पानी छिड़काव से यहां कम हो गया प्रदूषण
आंकड़ों में प्रदूषण घटाने को मंगलवार रात से बुधवार दिनभर इनकम टैक्स से तारामंडल तक पानी का छिड़काव हुआ। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में कमी आई है। पटना में तारामंडल में ही ऑटोमेटिक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगा है। इसी से वायु गुणवत्ता मापी जाती है। अन्य हिस्से में पानी का छिड़काव नहीं हुआ है, जिसके कारण उस इलाके में प्रदूषण नहीं घटा है।
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