#BIHAR #INDIA : सामान्य लोगों को सड़क पर चलना अब मुश्किल हो गया है। पांच से 10 मिनट तक सड़क के किनारे आप खड़े नहीं रह सकते हैं। धूलकण इतना फैल चुका है कि लोग मुंह और नाक बंद करके चल रहे हैं। शहर में वायु प्रदूषण विस्फोट हो चुका है। सड़क पर चलना किसी गैस चेंबर से बचकर निकलने के समान हो गया है। धूलकणों की मात्रा खतरनाक स्तर को भी पार कर चुकी है। तीसरे दिन मंगलवार को लगातार पटना देश का सबसे प्रदूषित शहर बना रहा।

शहर का शायद ही ऐसा कोई कोना होगा, जहां वायु प्रदूषण खतरनाक नहीं हुई होगी। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के मुताबिक देशभर में बिहार,उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण विस्फोट कर चुका है। बिहार में कुछ ज्यादा ही है। पटना में वायु प्रदूषण का न्यूनतम सूचकांक 349, औसत 417 और अधिकतम 435 है। पटना में वायु प्रदूषण की न्यूनतम स्थिति भी बहुत खराब है। शहर के सभी स्थलों को धूलकण अपनी गिरफ्त में ले चुका है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है धूलकण
धूलकण सबसे अधिक मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। सामान्य व्यक्तियों से लेकर दमा, सांस की बीमारी और एलर्जी वाले मरीजों के लिए जानलेवा हो गया है। मुंह खुलते ही धूलकण हवा के जरिए शरीर में जा रहे हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एंड अस्पताल के प्राचार्य ने बताया कि धूलकण से बचने के लिए आयुर्वेद की मदद ली जा सकती है। जिन्हें एलर्जी है वे एक गिलास दूध में एक दो चम्मच हल्दी पाउडर, 10 ग्राम गुड़ व अदरक डाल कर सेवन करेंगे तो धूलकण व धुएं से बचने में मदद मिलेगी। नाक में सरसों तेल लगाने से फायदा होगा। तुलसी का पत्ता, गोलकी और अदरक मिलाकर काढ़ा का सेवन करने से भी लाभ होगा।
