#BIHAR #INDIA : बिहार की गंगा और उसकी सहायक नदियों में पाए जाने वाले डॉल्फिन के आहार पर सं’कट गहरा रहा है। डॉल्फिन का प्रमुख आहार छोटी मछलियां है। इन मछलियों को मछली के कारोबारी निर्भिक होकर जाल गिराकर शिकार कर रहे हैं। वन विभाग की ओर से इसपर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है। जबकि छोटी मछलियों के मारने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा हुआ है। पटना की गंगा नदी में बालू घाट से लेकर गुलबी घाट के उसपार दियारा क्षेत्र में छोटी मछलियों का कारोबार सालों भर हुआ करता है। स्थानीय लोग और डॉल्फिन रिसर्चर इसकी सूचना भी देते लेकिन वन विभाग इसपर अमल नहीं करता है। वन विभाग की ओर से डॉल्फिन दिवस पर हरबार इसके संरक्षण को लेकर नदियों में गश्ती और विशेष दल गठन की घोषणाएं की जाती है। डॉल्फिन के सुरक्षा की पूरी जिम्मेवारी वन विभाग का है।

नदियों में 1339 डॉल्फिन का अधिवास
बिहार के नदियों में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वे अनुसार 1339 डॉल्फिन का अधिवास हैं। पटना के गंगा नदियों में दानापुर से फतुहा तक 30 डॉल्फिन पाए गए हैं। इधर बक्सर से मोकामा तक 333 और विभिन्न नदियों को मिलाकर एक हजार डॉल्फिन मिले थे। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया रविवार से पुन: डॉल्फिन पर सर्वे कार्य शुरू करेगा। पटना से फतुहा तक यह सर्वे होगा। इसमें कॉलेजों के कुछ छात्र भी रहेंगे। जो सर्वे के हुनर को सीखेंगे। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ गोपाल शर्मा ने बताया कि डॉल्फिन पर संकट गहराता हुआ दिख रहा है। उसके आहार को मछुआरे अपना कारोबार बना चुके हैं। इसपर प्रतिबंध नहीं लग रहा है। यदि यही स्थिति रही तो डॉल्फिन नहीं बचेगा।

