#BIHAR #INDIA : राज्य में लगने वाली नई चावल मिलों की क्षमता दोगुनी होगी। बिजली आधारित इन मिलों से दो टन धान की कुटाई रोज होगी। इसके पहले गैसीफायर वाले मिलों से एक ही टन की कुटाई होती थी। अब गैसीफायर आधारित चावल मिलें लगनी बंद हो गई हैं। बिजली की उपलब्धता बढ़ी तो सरकार ने इस प्रयोग को बंद कर दिया। साथ ही, मिलों की क्षमता का भी विस्तार कर दिया। साथ अब मिलों के साथ ड्रायर लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार ने इस वर्ष 91 चावल मिल लगाने का फैसला किया है। ये सभी मिलें बिजली आधारित होंगी। गैसीफायर वाले मिलों की चावल कूटने की क्षमता एक टन ही थी। नई व्यवस्था में बिजली आधारित मिलों की क्षमता दूनी कर दी गई है। ड्रायर लगने से इन मिलों में धान सूखाने में आसानी होगी। इसके लिए बड़े भूखंड (चटाल) की जरूरत नहीं होगी। जिन पैक्सों में ये मिलें होंगी वहां नमी वाले धान को ड्रायर से सूखाकर धान की सरकारी खरीद हो सकेगी।

राज्य में इस साल पैक्सों को एक लाख 60 हजार टन की क्षमता के गोदम का निर्माण करना है। इसके अलावा 91 यूनिट चावल मिल के निर्माण का लक्ष्य भी रखा गया है। दोनों योजनाएं स्वीकृत हो गई हैं। इन योजनाओं पर 170 करोड़ रुपये इस साल खर्च होने हैं। राशि भी सहकारिता विभाग को मिल गई है। इसके अलावा गत वर्ष के लंबित 42 चावल मिलों के निर्माण का काम इस वर्ष पूरा किया है। लेकिन ये सभी मिलें गैसीफायर वाली हैं। इसके पहले भी गैसीफायर योजना शुरू होने के बाद से अब तक राज्य में 402 चावल मिलें लगाई जा चुके हैं।
