#BIHAR #INDIA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि तीन दिनों पहले बिहार में वर्षा होने से फसलों को नुकसान हुआ है। लोग चिंता नहीं करें, जो भी क्षति हुई है, राज्य सरकार उसके लिए हर संभव मदद देगी। हमने फसल क्षति का आकलन करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिया है। हमारा मानना है कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। मुख्यमंत्री मंगलवार को कैमूर के भगवानपुर प्रखंड के मुंडेश्वरी धाम परिसर में जल-जीवन-हरियाली जागरूकता सम्मेलन में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 में ढाई करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। बाद में कोसी त्रासदी आयी। कई जिलों में सूखे की स्थिति बनी। हर हालत में आपदा पीड़ितों की सहायता की गई। हमलोगों ने सरकार में आने के बाद आपदा प्रबंधन नीति बनाई। बाढ़, सूखाड़ और कम बारिश होने के कारण इस वर्ष कुल 41 लाख 50 हजार आपदा प्रभावित लोगों को 2213 करोड़ 60 लाख की सहायता दी गई। इसके अलावा इनपुट सब्सिडी के तहत सहायता उपलब्ध करायी गई है। इन आपदाओं का एक प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन भी है।

बिहार में मनसून की समयावधि में भी बदलाव आया है। जहां पहले औसत वर्षा 1200 से 1500 मिमी तक होती थी। वहीं पिछले 13 वर्षों की औसत बारिश 901 मिमी हो गई है। इस खतरे से आमजनों को बचाने के लिए मैंने जल-जीवन हरियाली को मिशन मोड में चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत तालाब, कुओं, पोखर, आहर, पइन का जीर्णोंद्धार किया जाएगा। सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित होंगे। पौधरोपण किए जाएंगे। जलस्रोतों के पास सोख्ता बनवाए जाएंगे। आमजनों को भी अपने घरों व उसके आगे में सोख्ता बनवाना चाहिए। इस अभियान पर तीन वर्षों में 24 हजार 500 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जल-जीवन-हरियाली आज के समय में प्रासंगिक हो गया है।

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