
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर भारत बं’द के दौरान बुधवार को सीएए और एनआरसी को लेकर पक्की सराय समेत कई स्थानों पर वि’रोध प्रद’र्शन किया गया.

जिले के पक्की सराय चौक पर सुबह 10 बजे से इंसाफ मंच के बैनर तले रोड जा’म कर सैकड़ो की संख्या में लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया. इस दौरान राहगीरों को काफ़ी परेशा’नियों का सामना करना पड़ा. रोड जाम की सूचना पर पहुंचे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी के समक्ष भी कुछ अति उत्सा’ही युवकों द्वारा ज’मकर ना’रे लगाए गए, पर मौके पर मौजूद बुद्धिजीवियों और सामाजिक व्यक्तियों द्वारा स्थिति को नियं’त्रित रखा गया और किसी भी प्रकार की कोई अप्रि’य घट’ना घ’टित नहीं होने दी गयी. बं’द के दौरान मिठनपुरा थाना क्षेत्र के सतपुरा रेलवे गुमटी के नजदीक ट्रेन रो’के जाने को लेकर पुलिस प्रशासन पर उपद्र’वियों द्वारा पथ’राव के उपरांत ला’ठी चार्ज की सूचना मिली हैं. मिली जानकारी के अनुसार ला’ठीचा’र्ज के दौरान 3 व्यक्तियों के घा’यल होने की खबर हैं वहीं पुलिस द्वारा उप’द्रव फैलाने और रोड़ेबाजी के आ’रोप में दो युवकों को हिरा’सत में लिये जाने की बात कही जा रही हैं.

स्थानीय लोगों द्वारा शांतिपूर्ण प्र’दर्शन हेतु प्रशासन से 1 बजे तक का समय माँगा गया, जिसे अनुमंडलाधिकारी पूर्वी कुंदन कुमार और पुलिस उपाधीक्षक नगर रामनरेश पासवान द्वारा शांतिपूर्ण प्रद’र्शन करने की प्रतिबद्धता पर उनके ज’ज्बातों का सम्मान रखते हुए उन्हें मोह’लत दी गई. सभा स’माप्त होने तक 3 घंटों तक रोड जा’म रखने के सिवा किसी प्रकार की कोई उप’द्रव या त’नाव की शिका’यत नहीं प्राप्त हुई.

प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के वि’रोध में ज’मकर ना’रेबाजी की गई. कहा की हिंदुस्तान किसी की जा’गीर नहीं जो वो तय करेंगे की हिंदुस्तान में कौन रहेगा और कौन नहीं. प्याज़ की कीमतों से आमजन त्रस्त हैं, बेरो’ज़गारी बढ़ रहा है, इंडस्ट्री बंद हो रहे हैं, रुपये की कीमत गि’र रही है… लेकिन सरकार इन सबको छु’पाने के लिए एक बिल लेकर आ गई है. जो भी इसके ख़िला’फ़ आवाज़ उठा रहा है वो देशद्रो’ही की श्रेणी में शामिल हो जा रहा हैं.

आ’ज़ादी के समय बीजेपी नहीं थी फिर वो कैसे यह तय कर सकती है कि कौन देश का नागरिक रहेगा और कौन नहीं? आप आ’ज़ादी के आं’दोलन में नहीं थे, आपकी पार्टी का जन्म 1980 में हुआ था. आप गांधी, नेहरू, पटेल, आज़ाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस के साथ नहीं थे. आप पांच साल सत्ता में रहने के बाद यह तय करेंगे कि कौन नागरिक रहेगा और कौन नहीं.

प्रदर्शन के दौरान JNU के कई छात्र और पूर्व छात्र भी प्रद’र्शन में शामिल रहे जिन्होंने जेनयू विश्विद्यालय में हुए हम’ले का जिम्मेदार भारतीय जनता पार्टी को बताया और कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा जेनयू विश्विद्यालय में फीस बढ़ोतरी के बाद से ही जेनयू के छात्र प्रद’र्शन कर रहे हैं और फीस वृद्धि और अपने ह’क़ की ल’ड़ाई के लिये ल’ड़ रहे हैं. 2014 में बीजेपी सरकार आने के बाद से जेएनयू समेत देश के सभी विश्वविद्यालय सरकार के निशाने पर हैं, क्योंकि मौजूदा समय में देश के विश्वविद्यालयों के छात्र ही मजबूत वि’पक्ष की भूमिका अदा कर रहे हैं, देश के प्राथमिक मु’द्दों पर आवाज उठाते हुए सरकार से स’वाल करने की हिम्म’त कर रहे हैं, जिस कारण एएमयू, बीएचयू और अब जेएनयू सरकार के निशाने पर है.

जेएनयू के पूर्व छात्र व आइसा के जिला प्रभारी राहुल कुमार ने कहा की मौजूदा सरकार ने एक सा’जिश के तहत देश की शिक्षा व्यवस्था पर हम’ला कर दिया है. पहले एएमयू, फिर बीएचयू फिर जेएनयू जैसे देश के शिक्षण संस्थानों को बर्बा’द करने पर तुली है. अपने सहयोगी संगठनों की मदद से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं पर हम’ले करवा रही है. उन्हें यह लगता है की देश का युवा शिक्षित होगा तो तमाम मुद्दों पर सरकार से सवा’ल पूछेगा. सरकार के समक्ष मजबूत वि’पक्ष की भूमिका अगर कोई अदा कर रहा है तो वो है देश के विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं. वे छात्र जो समाज को बदलने के लिये शिक्षित होना चाहते हैं, पर सरकार कभी फीसवृद्धि कर तो कभी देशवि’रोधी बता कर शिक्षण संस्थानों को बर्बा’द करने पर आमादा है.

व्यवसायी सोनू खान ने कहा की जेएनयू की घटना श’र्मसार करने वाली है. जेएनयू में लगभग 100 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद 60-70 गुण्डों द्वारा छात्र-छात्राओं पर जा’नलेवा हम’ला किया जाता हैं और सरकार अभी तक जां’च कर रही है, मामले में अभी तक किसी की गिर’फ्तार तक नहीं कर सकी. उन्होंने कहा की सवाल जेएनयू, बीएचयू, एएमयू के खिलाफ अलग अलग हथकंडे अपना कर हम’ला का नहीं, सवाल रोजगार का है, सवाल मजदूर का है, सवाल किसानों का है, सवाल शिक्षा का है, जिसे मोदी सरकार ने शिक्षा बजट में कटौती कर अपनी मंशा पूर्व में ही जा’हिर कर दी है.

जफ़र आलम ने कहा की हमें सावरकर और जिन्ना की सोच का हिंदुस्तान नहीं बल्कि, गाँधी-नेहरू, अशफाक उल्लाह, मौलाना आजाद, अबुल कलाम और भगत सिंह की सोच वाला हिंदुस्तान चाहिए. हिंदुस्तान की खूबसूरती है इसकी गंगा-जमुनी तहजीब. अनेकता में एकता और आपसी भाईचारा. हालांकि, आजकल इसी खूबसूरती को खत्म करने में भी कुछ लोग लगे हुए हैं. धार्मिक उन्माद और नफ’रत फैलाने की कोशिश की जा रही है, पर हमारी गंगा जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और चट्टा’नी एकता और अमन और मोहब्बत से सारी सा’जिशे नाका:मयाब होंगी और देशवि’रोधी ताकतों के मन’सूबे ध्व’स्त हो जायेंगे. सीएए/एनआरसी मुद्दे पर प्रद’र्शन कर रही छात्रा रिजवाना खातून ने कहा की सरकार को इसे वा’पस लेना ही होगा, अगर सरकार इससे वापस नहीं लेती है और पीछे नहीं हटती है तो हम सब भी पीछे नहीं हटेंगे और लागतार सड़क पर उतर कर वि’रोध प्रद’र्शन करेंगे.

मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी की हुमा कौसर ने सरकार द्वारा लाये गए सीएए/एनआरसी को का’ला क़ा’नून बताया और कहा की देश के जिन युवाओं का खू’न देश की सीमा पर देश की रक्षा में बहाने के काम आना चाहिए उनका खू’न सरकार बहा रही है. जब 1947 में मुस’लमानों ने हिंदुस्तान को चुना, हिंदुस्तान को अपनाया, फिर आज ये सा’बित करने की जरुरत क्यों की हम हिंदुस्तान के नागरिक हैं.
पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी भी स्थिति से निप’टने हेतु नगर थानाध्यक्ष ओमप्रकाश, नगर थाना के दारोगा जितेन्द्र कुमार, क्यूआरटी टीम के साथ प्रभारी सुनील कुमार रजक समेत भारी संख्या में पुलिस ब’ल तैनात थी.

