#BIHAR #INDIA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में पर्यावरण के अनुकूल विकास की योजनाएं बन रही हैं। जलवायु में हो रहे परिवर्तन और पर्यावरण संकट के समाधान के लिए हमलोगों ने जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत की है। अभियान के तहत अगले तीन सालों में 24500 करोड़ खर्च किए जाएंगे। हरियाली को बढ़ाने के लिए आठ करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। भू-जल स्तरको संरक्षित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम किया जा रहा है। वाहन प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 वर्ष पुराने डीजल वाहनों के परिचालन को बंद करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री गुरुवार को बिहार संग्रहालय सभागार में केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के दो दिवसीय 64 वें सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई में हमने इलेक्ट्रिक वाहन से पटना में यात्रा शुरू की। इसके बाद कुछ मंत्री एवं वरीय पदाधिकारी को भी इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इलेक्ट्रिक वाहन के प्रयोग से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कानून भी बनाए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ी जरुरत लोगों को इसके बारे में जागरूक करने की है।

19 करोड़ पौधे लगाए गए
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड से अलग होने के बाद बिहार का हरित आवरण क्षेत्र नौ प्रतिशत था। सरकार में आने के बाद हमने हरियाली मिशन की शुरुआत की और 19 करोड़ पौधे लगाए गए। अब हरित आवरण क्षेत्र 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे आगे बढ़ाने के लिए भी हमलोग काम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन का असर मौसम पर भी साफ दिखने लगा है। बिहार में पहले औसत बारिश 1200 से 1500 मिमी होती थी। पिछले 30 वर्षों में घटकर यह 1027 मिमी हुआ और पिछले 13 वर्षों में घटकर 901 मिमी पर आ गया है। राज्य में कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की स्थिति बनी रहती है। वर्ष 2018 में राज्य के 534 प्रखंडों में से 280 प्रखंड सूखाग्रस्त घोषित किए गए थे।