
PATNA : पटना पुलिस लाइन में हुए विद्रोह मामले में नया मोड़ आने लगा है. बर्खास्त हुए सिपाहियों में कई लोगों ने आवेदन देकर यह गुजारिश की है कि वे लोग विद्रोह के दिन घटना में शामिल नहीं थे. वीडियो फुटेज देखकर यह सुनिश्चित कर लिया जाए. आखिर दूसरों की गलतियों की सजा उन लोगों का क्यों दी जा रही है. सीनियर एसपी के पास इस तरह के करीब 50 से ज्यादा आवेदन अबतक मिल चुके हैं. सोर्सेज से मिली जानकारी के मुताबिक इसमें कई महिला सिपाही भी शामिल हैं.

वीडियो देखकर 164 की पहचान हुई थी जिन्हें बर्खास्त किया गया था लेकिन अब करीब 80 सिपाहियों की और पहचान की गई है. अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. सोर्सेज से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही कुछ और को भी शामिल किया जायेगा. ऐसे में जिन लोगों की पहचान की गई है उनपर भी बर्ख़ास्तगी की तलवार लटक सकती है. इस मामले में आईजी एन एच खान ने एसएसपी मनु महाराज के अंडर टीम बनाई थी. सोर्सेज से मिली जानकारी के मुताबिक टीम के आफिसर्स को काम बांट दिया है और मामले की जांंच की रफ़्तार को तेज किया जा रहा है. जानकारी हो कि इस मामले में 164 को बर्खास्त किया गया था जबकि 175 पर नामजद और करीब चार सौ अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. 2015 और 2018 बैच की महिला सिपाहियों ने विद्रोह किया था. इसमे से एक हजार से अधिक को प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया है.

विद्रोह को लेकर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है मगर व्यवस्था की सच्चाई अब भी अलग है. कुछ सिपाहियों की मानेे तो पुलिस लाईन में अब भी वैसे ऑफिसर्स जमे है जो मामले की जड़ों में थे. इसपर कार्रवाई होना जरुरी है नहीं तो कभी भी बात और बिगड़ सकती है.