संक्र’मण से बचाव के उपायों को प्राथमिकता देते हुए जुलाई में खोले जा सकते हैं शिक्षण संस्थान

यदि स्थिति ठीक रही तो जुलाई में बिहार में शिक्षण संस्थान खोले जाएंगे। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने शिक्षण संस्थानों को खोलने की प्लानिंग तेज कर दी है। सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ और केंद्र एवं राज्य सरकार की सहमति बनी तो को’रोना सं’क्रमण से बचाव के तमाम उपायों को प्राथमिकता देते हुए सभी शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति दी जाएगी।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों से कोविड-19 के सं’क्रमण के फैलाव के मद्देनजर शिक्षण संस्थान खोलने एवं पठन-पाठन की व्यवस्था पर सुझाव (फीडबैक) सात जून तक मांगा है।

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शिक्षा विभाग के अपर सचिव गिरिवर दयाल सिंह ने गुरुवार को बताया कि केंद्र सरकार ने जून में शिक्षण संस्थान खोलने के लिए राज्य सरकारों से फीडबैक मागा है तो बिहार इसके लिए पहले ही तैयार है। सभी जिलों से दस बिंदुओं पर सुझाव ई-मेल पर मांगा गया है। विद्यालय या संस्थान को किस तिथि से खोला जाए। कक्षाओं में नामांकन कब से प्रारंभ किया जाए। स्कूल समेत अन्य शिक्षण संस्थानों की संचालन की अवधि क्या हो? कक्षा का संचालन अधिकतम कितने बच्चों के साथ किया जाए? कक्षा की अवधि क्या हो? कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था कैसी हो? प्रार्थना सत्र का संचालन किया जाए या नहीं? विद्यालय में प्रवेश व निकास की व्यवस्था कैसी हो? विद्यालय व कक्षा में शारीरिक दूरी की व्यवस्था कैसे लागू की जाए? इन बिंदुओं पर सुझाव आने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी।

इसके बाद केंद्र एवं राज्य सरकार के निर्देश के आलोक में शिक्षण संस्थानों को खोलने पर निर्णय लिया जाएगा। नामांकन से लेकर कोर्स पूरा करने की प्लानिंग शिक्षा विभाग ने स्कूलों को खोलने, विद्यार्थियों का नामांकन कराने और कोर्स पूरा कराने की भी प्लानिंग कर चुका है।

 

 

स्कूलों के बच्चों की दो माह से ज्यादा दिनों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। ऐसे में शिक्षा विभाग की प्लानिंग है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई की भरपाई अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर की जाए। साथ ही कोर्स को भी कम कर दिया जाए। विद्यार्थियों की दो घटे अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। राज्य के सरकारी एवं निजी स्कूलों में ढाई करोड़ से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों के इंटरनल टेस्ट नहीं लेने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि कोर्स पूरा कराया जा सके।

स्कूलों के खुलने पर बच्चों के लिए मास्क और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों में सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाएगी। बुखार, खासी-जुकाम आदि से पी’ड़ित बच्चे का स्कूल में आना वíजत रहेगा। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए भी मास्क लगाना जरूरी होगा।

Input : जागरण

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