केंद्र सरकार को एक साल से दी जा रही थी ऑक्सी’जन के लिए चे’तावनी, तब क्या करते रहे?

NEW DELHI : कोरो’ना की देश में दूसरी ल’हर के बीच ऑक्सी’जन की कि’ल्लत बड़ी सम’स्या के रूप में सामने आई है. ऑक्सी’जन के लिए देश भर के अस्प’ताल हां’फ रहे हैं. हाई कोर्ट, सुप्रीम को’र्ट को अस्प’तालों में ऑक्सी’जन उपलब्ध कराने के लिए आगे आना पड़ा. दिल्ली हाई को’र्ट ने तो 21 अप्रैल को केंद्र सरकार से यह तक कह दिया कि आप उधा’र मांगिए, खरी’दिए या चोरी करिए लेकिन कहीं से भी ऑक्सी’जन का इंत’जाम करिए. आखिर ऑक्सीजन की इतनी कि’ल्लत के हाला’त कैसे बन गए? क्या इन हाला’तों का किसी को कोई आभा’स नहीं था? अगर था, तो किया क्या गया. आइए जानते हैं वि’स्तार से.

पिछले साल ही आगाह कर दिया गया था

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में 23 अप्रैल को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में लॉ’क डाउन के एक हफ्ते बाद सेंटर फॉर प्ला’निंग द्वारा गठित अफसरों के 11 सदस्यों वाले एक समू’ह ने ऑक्सी’जन की क’मी को लेकर सरकार को अल’र्ट किया था. यह एम्पावर्ड ग्रुप 6 (EG-6) था, जिसे प्राइवेट सेक्टर, एन’जीओ और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सह’योग करने के लिए बनाया गया था. इस कमेटी ने पहली बार सरकार को ठीक एक साल पहले 1 अप्रैल, 2020 को और दूसरी बार नवंबर 2020 में हुई बैठकों में ऑक्सी’जन की कमी को लेकर चे’ताया था. इस मी’टिंग में कहा गया था,
“आने वाले दिनों में भारत को ऑक्सी’जन स’प्लाई में कि’ल्लत का सामना करना पड़ सकता है. इससे निप’टने के लिए सीआईआई (Confederation of Indian Industry) इंडियन गैस एसोसिएशन के साथ सह’योग करेगा और ऑक्सी’जन स’प्लाई की कि’ल्लत को कम करेगा.”
Need Oxygen cylinders at home? Check out these contacts | India News | Zee  News नी’ति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत के प्रिंसिपल सांइ’टिफिक एडवाइजर के विजय राघवन, एनडीएमए सदस्य कमल किशोर और भारत सरकार के कई इकाइयों के आधा दर्जन अधिकारी मौजूद थे. इनमें पीएमओ, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय आदि से भी लोग शामिल थे.

इन बातों पर एक्शन क्या हुआ?

बैठक में शामिल एक अफसर के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है,
“तय हुआ था कि डीपीआईआईटी (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) इस मसले को देखेगा.”
रिकॉर्ड बताता है कि बैठक के 4 दिन बाद 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई ताकि कोरो’ना महामा’री के मद्देनजर मेडि’कल ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराई जा सके. इस कमेटी के अध्यक्ष डीपीआईआईटी सचिव गुरुप्रसाद महापात्रा थे. बता दें कि खास कमेटी EG6 ने जब ऑक्सी’जन की कमी का मामला उठाया था उस वक्त देश में रोज सिर्फ 2000 कोरो’ना के केसेज सामने आ रहे थे.

हेल्थ मिनिस्ट्री ने भी ऑक्सी’जन पर चे’ताया था

ऐसा नहीं है कि ऑक्सी’जन को लेकर सिर्फ EG6 ने ही आगाह किया था संसदीय स्थायी कमेटी की एक मीटिंग 16 अक्टूबर 2020 को हुई थी. समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली इस कमेटी के सामने केंद्रीय हेल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण ने बताया था कि को’विड मरी’जों के लिए ऑक्सी’जन किस तरह से कार’गर सा’बित हो रही है. संसदीय कमेटी की एक रिपोर्ट “The Outbreak of Pandemic Covid-19 and Its Management” में कहा गया है,
हे’ल्थ सेक्रेटरी ने कमेटी को जानकारी दी है कि स्वा’स्थ्य मंत्रालय ने नेशनल फार्मास्यूटिक प्राइसिंग अथॉ’रिटी (NPPA) से कहा है कि इला’ज के लिए काम आने वाली ऑक्सी’जन के दाम तय करे. हे’ल्थ सेक्रेटरी ने यह भी बताया है कि को’विड से पहले मेडि’कल ऑक्सी’जन का इस्तेमाल 1000 मीट्रिक टन रोज था और 6000 मीट्रिक टन ऑक्सी’जन का इस्तेमाल कारखा’नों में होता था. ऐसे में इस बात की स’ख्त जरू’रत है कि ऑक्सी’जन की सप्लाई को सही तरह से मैनेज किया जाए और उनकी की’मतें तय की जाएं.

इस साल क्या हुआ?

अब इस साल में आते हैं. कोरो’ना की दूसरी ल’हर की शुरुआत हो रही थी. 30 मार्च, 2021 को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के भीतर ऑक्सी’जन की इकाइयों को रेग्यु’लराइज और ऑक्सी’जन की स’प्लाई को लेकर एक आदेश जारी किया. इस आदेश में कहा गया.
पै’दा होने वाली ऑक्सी’जन का 80 फीसदी इस्ते’माल मेडि’कल जरू’रतों के लिए होगा. इसे महाराष्ट्र के अस्प’तालों में भेजा जाएगा.
जिस दिन यह आदे’श दिया गया उस दिन देशभर में कोरो’ना के 53,000 मरीज रोज आ रहे थे. कोरो’ना की सेकेंड वेव ने र’फ्तार पकड़ना शुरू ही किया था. वहीं, भारत सरकार ने इंडस्ट्री को इस तरह का आदेश पिछले हफ्ते भेजा है. इसे भी 22 अप्रैल, 2021 से लागू किया गया है. इसमें ऑक्सी’जन के 60 फीसदी उत्पा’दन को मेडि’कल इस्ते’माल के लिए रखने की बात कही गई है.                             
 

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