पुलिसकर्मियों और अफसरों को अब अपनी वर्दी टाइट रखनी होगी। एकदम चकाचक। लुंज-पुंज वर्दी में पाए गए तो अनुशासनिक कार्रवाई तय है। पुलिस मुख्यालय ने कहा कि वरीय पदाधिकारी समय-समय पर थानों, प्रतिनियुक्ति स्थलों, पुलिस केंद्राें एवं विभिन्न कार्यालयों का दौरा कर वर्दी एवं परिधान के संबंध में औचक निरीक्षण करेंगे। साथ ही विहित प्रावधानों व मानदंडों के अनुसार वर्दी धारण नहीं करने वाले पदाधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करेंगे। डीजीपी एसके सिंघल ने इस बाबत सभी डीजी, एडीजी, आईजी, डीआईजीष एसएसपी व एसपी को आदेश जारी कर दिया है।
आदेश में कहा गया है कि सामान्यत: पुलिस पदाधिकारी व कर्मी वर्दी का सही तरीके से रखरखाव एवं पहनावे के प्रति गंभीर होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में देखा जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान पुलिस पदाधिकारी व कर्मी वर्दी की बजाय अन्य परिधानों में होते हैं। साथ ही वर्दी पहनने का तरीका एवं उनका रखरखाव भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं होता है, जिसके कारण न केवल वर्दी के प्रति असम्मान का भाव प्रदर्शित होता है, बल्कि
समुचित ढंग से वर्दी नहीं पहनने के कारण आमजनों के बीच भी पुलिस की छवि धूमिल होती है। डीजीपी ने यह भी कहा है कि वर्दी बेहतर पुलिसिंग में भी एक महत्वपूर्ण आयाम की तरह काम करता है। बिहार पुलिस मैन्युअल के अध्याय 33 में वर्दी और परिधान के संबंध में विस्तृत रूप से उल्लेख किया गया है। साथ ही कई आदेशों के द्वारा भी वर्दी के रख-रखाव एवं सही ढंग से धारण करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

जहां वर्दी की अनिवार्यता नहीं, वहां भी कार्यालय के अनुरूप परिधान जरूरी
डीजीपी ने कहा है कि बेहतर पुलिसिंग में वर्दी के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार पुलिस बल के सभी पंक्ति के पदाधिकारियों व कर्मियों को वर्दी एवं परिधान भत्ता देती है। लिहाजा, राज्य पुलिस के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी ड्यूटी के दौरान मापदंडों के अनुसार वर्दी धारण करना सुनिश्चित करें। वर्दी साफ-सुथरी एवं सही स्थिति में होनी चाहिए। जिन कार्यालयों में वर्दी धारण करने की अनिवार्यता नहीं है, वहां भी परिधान मर्यादित एवं कार्यालय के अनुरूप होना चाहिए।