जल ग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश से जिले से गुजरने वाली बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक के साथ सहायक नदियां पूरे उफान पर है। तीनों प्रमुख नदियों के साथ ही लखनदेई, मनुषमारा एवं बाया नदी भी अपने क्षेत्र में कहर बरपा रही है। बागमती के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि होने से औराई, कटरा व गायघाट की 3.50 लाख से अधिक आबादी बाढ़ प्रभावित हो गई है।
गंडक नदी के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि होने से साहेबगंज प्रखंड की 7 पंचायत के 6000 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इसी प्रकार बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहरी क्षेत्र के सिकंदरपुर में खतरे के निशान के करीब पहुंच जाने से झील नगर, कर्पूरी नगर, चंदवारा, शेखपुर ढाब से लेकर अहियापुर थाना के चारों ओर के मोहल्ले व घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है।

मंगलवार की सुबह गंडक बराज से 307200 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंडक के साथ ही बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में अभी तेजी से उफान जारी रहने की संभावना है। गंडक नदी का जलस्तर रेवा घाट में 29 सेंटीमीटर वृद्धि के साथ खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर व बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहर के सिकंदरपुर में 17 सेंटीमीटर वृद्धि के बाद खतरे के निशान से केवल 23 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। जिले के औराई, कटरा, गायघाट, मुशहरी, कांटी के साथ साहेबगंज प्रखंड में बाढ़ की स्थिति ज्यादा खराब है।

बेनीबाद-कटरा-औराई तथा बकुची- जजुआर पथ पर आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध है। बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी होने से शहरी क्षेत्र के अखाड़ाघाट से लेकर जीरोमाइल व मेडिकल कालेज के सामने विजयी छपरा गांव में पानी फैल रहा है। शेखपुर ढाब में तेजी से पानी फैलने से लोग पलायन कर रहे हैं। कांटी की मिठनसराय पंचायत में पानी फैल रहा है।
बागमती कटौंझा में खतरे के निशान से 1.38 तो बेनीबाद में 1.31 मीटर ऊपर
जिले में नदियों का जलस्तर
- गंडक का जलस्तर रेवा घाट में खतरे के निशान 54.41 से ऊपर 55.02 व बूढी गंडक नदी का जलस्तर शहर के सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 से नीचे 52.30 पर है।
- इसी प्रकार बागमती नदी का जलस्तर कटौझा में खतरे के निशान 55.0 मीटर से ऊपर 56.38 व बेनीबाद में खतरे के निशान 48.68 से ऊपर 49.99 पर है।

तिरहुत तटबंध पर 5 दर्जन परिवार सामान-मवेशी के साथ डाले हैं डेरा
गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बराज से रविवार की सुबह छोड़े गए 2 लाख 48 हजार क्यूसेक पानी का बहाव साहेबगंज क्षेत्र से मंगलवार को हुआ। मंगलवार की देर शाम में रविवार की शाम 6 बजे छोड़े गए 3 लाख 28 हजार क्यूसेक पानी का बहाव होने लगा। इससे मंगलवार की सुबह के मुकाबले शाम में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा। ग्रामीणों को बाढ़ से अभी भी राहत नहीं मिली है। बाढ़ से सात पंचायतों के 34 वार्ड की 12 हजार आबादी अभी भी घिरी हुई है। वहीं तिरहुत तटबंध पर अभी भी 5 दर्जन परिवार माल-मवेशी के साथ शरण लिए हुए हैं, जबकि बाढ़ पीड़ित मकानों पर बने मचान पर शरण लिए हैं। वहीं रेवा घाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 16 सेमी ऊपर बह रहा था।

बिंदा से बुधनगरा बांध तक 30 से अधिक बोकर
बूढ़ी गंडक नदी के जल स्तर में लगातार हो रही वृद्धि से एक बार फिर से बांध के अंदर निचले इलाके में रह रहे लोग दहशत में आ गए हैं। डुमरी, रजवारा भगवान, बड़ा जगन्नाथ, अब्दुल नगर, शेखपुर आदि गांव के सैकड़ों परिवार फिर से अपना मवेशी और घर परिवार के साथ ऊंचे स्थान पर पलायन करने को विवश हो गए हैं। बिंदा से बुधनगरा बांध तक 3 किलो मीटर में 30 से अधिक बड़े-बड़े बोकर बन गए हैं, इससे बूढ़ी गंडक बांध पर खतरा बढ़ गया है।