शहर में बिना जांच के बड़ी संख्या में प्रवासी प्रवेश कर रहे हैं। ट्रेन व बस पड़ाव पर उतरने के बाद उनके एंटीजन किट से जांच नहीं हो रही है। जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों से जिले में एंटीजन किट मुख्यालय से नहीं आ रहा है। इधर प्रतिदिन करीब पांच से सात हजार के बीच ट्रेन व बस से यात्री शहर में आ रहे हैं। बिना एंटीजन जांच के ही घर जा रहे हैं।



थर्मल स्क्रीनिंग से हो रही जांच
बाहर से आने वाले रेलवे स्टेशन पर एंटीजन किट न होने से केवल थर्मल स्क्रीनिंग से काम चलाया जा रहा है। इसी तरह से सदर अस्पताल बस पड़ाव पर जांच नहीं हो रही है। अभी केवल आरटीपीसीआर जांच ही हो रही है। जांच के पर्यवेक्षक मनोज कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर छह काउंटर है। इसमें एक काउंटर आरटीपीसीआर के लिए चलाया जा रहा है। वहीं बस पड़ाव व सदर अस्पताल में काउंटर बंद हैं। किट नहीं रहने से रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की एंटीजन जांच करने की बजाए, मात्र उनकी थर्मल स्क्रीनिंग ही जा रही है। अगर कोई संदिग्ध है तो उसकी आरटीपीसीआर जांच हो रही है। इधर सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा ने बताया कि किट बहुत जल्द उपलब्ध होगी और उसके बाद फिर नियमित जांच होगी।

एईएस से मुक्त हुआ तो वायरल बुखार की चपेट मेें आया
मुजफ्फरपुर : एईएस के बाद अब वायरल बुखार की चपेट में आए बच्चे का एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में इलाज चल रहा है। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा. गोपाल शंकर सहनी ने बताया कि पीकू वार्ड में भर्ती मुशहरी के दो वर्षीय काॢतक कुमार को वायरल बुखार है। उसको चार सितंबर को भर्ती कराया गया था। अभी वायरल बुखार होने के बाद एईएस पीडि़त बच्चे में ब्रांकियोलाइटिस की जांच करायी जा रही है। डा. सहनी ने बताया कि काॢतक पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका था। उसे डिस्चार्ज भी किया जाना था। इस बीच शनिवार को उसे वायरल बुखार हो गया। उसे फिर से भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इधर, एईएस पीडित 18 माह की शाहिस्ता प्रवीण को स्वस्थ्य होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। डा. सहनी ने कहा कि शाहिस्ता की देखभाल करने को कहा गया है। वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ा है। ऐसे में देखभाल में लापरवाही बरते जाने पर बुखार हो सकता है। अभी मौसम वायरल बुखार का है इसलिए लापरवाही ठीक नहीं है।
