यूजीसी की ओर से लाइब्रेरी, इंफ्रास्ट्रक्चर, खेल कूद के स्टेडियम और स्वीमिंग पुल बनाने के लिए एक कॉलेज दो करोड़ रुपये दिए थे। लेकिन, इस राशि से न तो कॉलेजों में स्वीमिंग पुल बना और न लाइब्रेरी के लिए किताबें आयीं।
बीआरए बिहार विवि के कॉलेजों को यूजीसी और दूसरी कई सरकारी एजेंसियों से मिली अनुदान की राशि जांच के घेरे में आ गई है। निगरानी ने इसमें गड़बड़ी की आशंका जताते हुए रिपोर्ट की गयी है । मुकेश कुमार नामक एक व्यक्ति की शिकायत के बाद निगरानी ने शिक्षा विभाग से और फिर उच्च शिक्षा निदेशक ने विवि प्रशासन को पत्र भेजकर अनुदान राशि के खर्च की पूरी जानकारी मांगी थी।
विवि एक अधिकारी ने बताया कि निगरानी के पत्र के बाद कॉलेजों से 10 वर्षों का हिसाब मांगा गया तो कुछ कॉलेजों ने ऑडिट रिपोर्ट दे दी। इसमें यह नहीं बताया गया कि जो राशि उन्हें मिली थी वह किस मद में खर्च की गई। ऐसे कॉलेजों के भेजे जवाब को रोक कर रखा गया है। इन्हें दोबारा से नोटिस भेजने की तैयार की जा रही है।
यूजीसी की राशि की गड़बड़ी के आरोप में बिहार विवि के कुछ संबद्ध कॉलेजों की जांच भी हो चुकी है। इन कॉलेजों पर आरोप था कि उन्होंने यूजीसी से मिली राशि का गलत इस्तेमाल किया और उसकी गलत सूचना यूजीसी को दी। राशि की उपयोगिता में भी हेरफेर का आरोप इन कॉलेजों पर लग चुका है। इन कॉलेजों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी।