एक पहल : स्कूलों में बच्चियों के लिए एक घंटी निर्धारित कर दिखाई जाएगी ज्ञानवर्धक फ़िल्में।

साइंस, सोशल साइंस, मैथ की तरह सरकारी स्कूलों में हर हफ्ते एक फिल्म शो की घंटी भी बजेगी। यह घंटी रूढ़िवादिता और कुंठा की जंजीर तोड़ बेटियों को आगे बढ़ने में मदद करेगी। सरकार की ओर से हाई स्कूल और प्लस 2 स्कूलों में एक अनोखी पहल की गई है। जिले के 120 तो सूबे के लगभग दो हजार स्कूलों में यह प्रोग्राम चलेगा।Education reform: Kerala's public schools see rise in student enrolments  for first time in 25 yearsविभाग की ओर से पहले चरण में स्कूलों का चयन किया गया है, जहां यह प्रोग्राम चलाया जाना है। जेंडर गैप को खत्म करने और इस उम्र में शारीरिक व मानसिक बदलाव में गलत जानकारी की वजह से कुंठा की शिकार हो रही बेटियों को बचाने केलिए यह पहल है। बिहार शिक्षा परियोजना और यूनिसेफ ने बच्चियों के लिए नौ वीडियो फिल्म बनाई है। स्कूलों में बच्चियों के लिए एक घंटी निर्धारित कर फिल्में दिखाई जाएंगी।हर एक फिल्म दिखाने के साथ बीच-बीच में बच्चियों से सवाल भी किए जाएंगे। यही नहीं, बच्चियां भी अपने सवाल करेंगी। विभाग ने इसके लिए भी एक फॉर्मेट बनाया है। बेटियों के पूछे गए सवाल का शिक्षकों को दस्तावेजीकरण करना है और हर 15 दिन पर इससे संबंधित रिपोर्ट करनी है।तमाम कोशिशों के बावजूद बढ़ रहा जेंडर गैप व लिंग भेद का अंतर : बिहार शिक्षा परियोजना के निदेशक ने इस संबंध में मुजफ्फरपुर समेत सभी जिले के डीईओ को निर्देश दिया है। विभिन्न जिलों से मिली रिपोर्ट के अनुसार तमाम कोशिशों के बावजूद जेंडर गैप और लिंग भेद बढ़ता जा रहा है। निदेशक ने निर्देश दिया है कि लिंग भेद और जेंड गैप दो अलग-अलग चीजें हैं। जरूरत है कि स्कूल में इस तरह की पहल हो कि बच्चियां रूढ़िवादी सोच, अवसाद, तनाव, कुंठा को तोड़ बाहर निकल सकें। जिन स्कूल में स्मार्ट क्लास है, वहीं यह घंटी लगेगी।

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