समस्तीपुर में प’कड़ाया सं’दिग्ध, फ’र्जी दस्तावेजों के साथ गि’रफ्तार

प्रशासनिक महकमे में  एक नेपाली संदिग्ध युवक पकड़ा गया। युवक के पास से विदेशी करेंसी, कई दस्तावेज और महत्वपूर्ण तस्वीरें बरामद की गई हैं।  नेपाल की नागरिकता पहचान पत्र के आधार पर युवक का नाम मोहम्मद अताउल्लाह बताया जा रहा है। बीआरबी कॉलेज में जब यह नेपाली सं’दिग्ध इंटरमीडिएट का मूल प्रमाण पत्र लेने के लिए पहुंचा तो कॉलेज स्टाफ अलर्ट हो गए। जैसे ही उसने काउंटर पर मूल प्रमाण पत्र के लिए अपने कागजात दिए, कागजात देखने के बाद कॉलेज प्रशासन को शक हुआ और कागजात की जांच पड़ताल शुरू हुई। इसमें इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया और कॉलेज के द्वारा दिये जाने वाले कॉलेज लीविंग सर्टिफिकेट भी फर्जी पाया गया। शक उस वक्त और गहरा हो गया जब युवक के पास से विदेशी करेंसी बरामद हुई। इस युवक को पुलिस हि’रासत में भेजा गया है।Nepali citizenship fake intermediate residential income certificatei  foreign currency suspect youth caught in samastipur brvj - नेपाल की  नागरिकता, फर्जी इंटरमीडिएट, मोतिहारी से आवासीय व आय प्रमाण ...

हालांकि, पुलिस  इस पूरे मामले में जांच की बात कह रही है।  इस मामले में बलराम भगत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ वीरेंद्र कुमाार चौधरी ने बताया कि कॉलेज के सर्टिफिकेट और कॉलेज के परीक्षा कोर्ट में फर्क पड़ने के बाद जब इसके कागजातों का सत्यापन किया गया तो पूरी तरह से फर्जी पाया गया।  इसके बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई और इसकी लिखित शिकायत भी थाने में की गई है। उन्होंने कहा कि छात्र की गतिविधि सं’दिग्ध लग रही है। बहरहाल, जिस तरह के कागजात नेपाली संदिग्ध युवक के पास से मिले हैं उससे जाहिर होता है कि शिक्षा मा’फिया एक तरफ जहां अब भी तमाम सतर्कता के बाद सिस्टम पर हावी हैं तो दूसरी तरफ दूसरे दस्तावेज यह बता रहे हैं कि कहीं ना कहीं युवक की भूमिका संदिग्ध है। जिस तरह से बिहार में पिछले कुछ सालों से आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं, ऐसे हालात में देश के बड़ी जांच एजेंसी भी इस मामले में पड़ताल कर सकती है। युवक के पास नेपाल की नागरिकता पहचान पत्र है और उसने बेंगलुरु से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का प्रमाण पत्र इंटरमीडिएट का है, उसका भी सत्यापन करवाया गया तो वह फर्जी पाया गया। युवक के पास से माध्यमिक शिक्षा परिषद मध्य भारत, ग्वालियर,  मध्य प्रदेश का इंटरमीडिएट मार्कशीट भी मिला है, जिससे शक और भी गहरा होता जा रहा है। सवाल उठता है कि जब युवक ने मध्य प्रदेश से इंटरमीडिएट की डिग्री ली तो फिर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से डिग्री क्यों ली? जब पकड़े गए युवक के पास नेपाल सरकार का नागरिकता पहचान पत्र है तो ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि उसे बिहार के चम्पारण इलाके से आवासीय और आय प्रमाण पत्र बनवाना पड़ा?

युवक के पास मिले शिक्षा संबंधी दस्तावेजों से साफ झलक रहा है किस तरह शिक्षा माफिया सरकारी तंत्र पर हावी है और फर्जी प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं।  वहीं, यह नेपाल की पहचान पत्र रखने वाला यह युवक बिहार के मोतिहारी इलाके से भी आवासीय प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेता है और कोई पड़ताल भी सही ढंग से नहीं होती है। कहीं ऐसा तो नहीं युवक के पास जो भी दस्तावेज है, चाहे वह नेपाल के हों या भारत के अलग-अलग जगहों पर बने हों, सब के सब फ’र्जी ही हैं? कहीं यह युवक किसी दूसरे कार्य में तो संलिप्त नहीं?

युवक के पास से कुछ युवकों की तस्वीरें भी बरामद हुई हैं जिसके बारे में भी युवक स्पष्ट तौर पर कुछ भी नहीं बता रहा है। इतना उसके द्वारा जरूर कहा जा रहा है कि वह उसका दोस्त है, लेकिन उस दोस्त का नाम क्या है, नहीं बता रहा है। जब युवक से सवाल किया गया तो उसने बताया कि उसे यह सर्टिफिकेट समस्तीपुर के रहने वाले एक शख्स के द्वारा दिया गया जो बेंगलुरु में उसके साथ रहने वाले मोहम्मद रियाज के जान-पहचान का है। जिस तरह के कागजात नेपाली संदिग्ध युवक के पास से मिले हैं उससे जाहिर होता है कि शिक्षा माफिया एक तरफ जहां अब भी तमाम सतर्कता के बाद सिस्टम पर हावी हैं तो दूसरी तरफ दूसरे दस्तावेज यह बता रहे हैं कि कहीं ना कहीं युवक की भूमिका संदिग्ध है। जिस तरह से बिहार में पिछले कुछ सालों से आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं, ऐसे हालात में देश के बड़ी जांच एजेंसी भी इस मामले में पड़ताल कर सकती है।

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