सीएम हाउस में नौकरी दिलाने के बहाने ठगा , गि’रफ्तार

ठ’गी तो आम बात हो गया है बिहार में , घटना पटना की है, जहां सीएम हाउस में वीडियोग्राफर की नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े जालसाज अनिल कुमार सिंह को पाटलिपुत्र थाने की पुलिस ने नेहरूनगर इलाके से धर दबोचा। वह नेहरूनगर के आरडी टावर के ए-15 में रहता है।  पुलिस ने आरोपित अनिल का मोबाइल ज’ब्त कर लिया है। पुलिस ठग के बैंक खातों को भी खंगालेगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों के साथ इसने ठगी की है। जालसाज अनिल सिंह कभी रॉ तो कभी एनआईए का अधिकारी बन जाता था। युवकों को भरोसा दिलवाने के लिए वह सरकारी कार्यालयों और अफसरों के नाम का फर्जी मुहर इस्तेमाल करता था।

Handcuffs Silhouette Arrest, handcuffs, police Officer, text png | PNGEgg

दरभंगा एसएसपी बाबूराम का मुहर मारा फर्जी पैड बरामद होने के बाद यह कयास लगाये जा रहे हैं कि जालसाज पुलिस मकहमे में भी नौकरी दिलवाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करता होगा। छानबीन पूरी होने के बाद अन्य बातों का खुलासा होगा।

पाटलिपुत्र थानेदार एसके शाही ने बताया कि अनिल पर लखनऊ में एक लड़की को छत से फेंककर हत्या करने की एफआईआर दर्ज है। अनिल द्वारा ठगे गए मूल रूप से मनेर के रहने वाले विवेक कुमार ने बताया कि एक साल पहले उसकी मुलाकात अनिल से हुई थी। उसने सीएम हाउस में नौकरी दिलवाने के नाम पर उससे एक लाख रुपये और एक लैपटॉप ले लिया। जब नौकरी नहीं लगी तो शक हुआ और वह उससे अपने पैसे की मांग करने लगा तो अनिल ने अपना मोबाइल ही बंद कर लिया।

विवेक साईं मंदिर के समीप से जा रहा था। उसी वक्त उसकी नजर अनिल पर पड़ी। उसने अनिल को पकड़ा तो आसपास के लोग जमा हो गये। दोनों के बीच मारपीट होने लगी। इतने में पाटलिपुत्र थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को लेकर थाने चली आयी। वहां पीड़ित विवेक ने बताया कि अनिल ने उससे सीएम हाउस में नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख रुपये लिये थे। यह सुनकर पुलिस चौंकी। मामले को गंभीरता से लेते हुये फौरन पाटलिपुत्र थानेदार ने आरोपित के घर छापेमारी की। इस दौरान वहां से फर्जी कागजात बरामद किये गये। ठग अनिल ने भरोसे में लेने के लिए विवेक को जूडिशियल मजिस्ट्रेट का मुहर लगा एक फर्जी पहचान पत्र दिया था। इसे देकर उसने विवेक से सीएम हाउस में जाकर योगदान देने को कहा। इसके बाद विवेक को पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है। पुलिस ने आरोपित अनिल का मोबाइल जब्त कर लिया है। बकौल थानेदार इस पहलू पर जांच की जायेगी कि वह किन-किन लोगों से बात करता था। पुलिस ठग के बैंक खातों को भी खंगालेगी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों के साथ इसने ठगी की है। जालसाज अनिल सिंह कभी रॉ तो कभी एनआईए का अधिकारी बन जाता था। युवकों को भरोसा दिलवाने के लिए वह सरकारी कार्यालयों और अफसरों के नाम का फर्जी मुहर इस्तेमाल करता था।

 

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