मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की ओर से जारी स्नातक-सत्र 2019-22 के प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी को दूर करने के लिए टेबलेटर नियुक्त किए गए हैं। एक लाख से अधिक विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे।
इसमें से करीब 20 हजार विद्यार्थियों के परिणाम में गड़बड़ी हुई थी। विद्यार्थियों को प्रायोगिक विषय में अनुपस्थित बताया गया था, जबकि वे परीक्षा में शामिल हुए थे। कई कॉलेजों के सभी विद्यार्थियों का परिणाम प्रमोटेड बताया गया था। इसपर विवि की ओर से कहा गया कि साफ्टवेयर में गड़बड़ी और कॉलेजों की ओर से प्रायोगिक परीक्षा का अंक नहीं भेजे जाने के कारण ऐसा हुआ था।
परीक्षा नियंत्रक डा. संजय कुमार के अनुसार टेबलेटर की नियुक्ति कर दी गई है। काफी परिणाम को ठीक कर लिया गया है। टेबलेटर उन्हें देखेंगे और अन्य जो परिणाम सुधारे जाने हैं उनपर तेजी से कार्य करेंगे।
कहा कि कालेजों को कहा गया था कि प्रायोगिक परीक्षा का अंक उपलब्ध कराएं। इसके बाद भी कई कॉलेजों की ओर से अब तक अंक नहीं भेजा गया। ऐसे में परिणाम में सुधार में समय लगने पर कालेज जिम्मेवार होंगे।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी पीजी प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ी को 15 तक ठीक कर लिया जाएगा। उर्दू में रोल नंबर और नाम में हुई गड़बड़ी को सुधार लिया गया है।
वहीं अर्थशास्त्र और इतिहास समेत अन्य विषयों की गड़बड़ी को ठीक किया जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार परिणाम में हुई गड़बड़ियों को दूर कर परिणाम फिर से वेबसाइट पर 15 जनवरी तक अपलोड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों के प्रायोगिक परीक्षा का परिणाम नहीं दिख रहा था उनका अंक विभाग से मंगाकर कालम में भरा जा रहा है। विद्यार्थी घबराएं नहीं न उन्हें विवि आना है। परिणाम शीघ्र सुधार दिया जाएगा।

