मुजफ्फरपुर। एक साहब को कुछ आरटीआई मांगने वालों की बातों को भी उन्होंने दिल पर ले लिया। एक सूचना के लिए पांच लाख रुपए तय करने के उनके निर्णय को ऊपर ले जाने वाले पर उनकी भृकुटी तन गई है।

सूचना मांगने वाले को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रा’थमिकी तक की अनुशंसा कर दी है। वह भी सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाकर।
अब इन्हें कौन समझाए की आरटीआइ मांगने से सरकारी काम में कैसे बा’धा पहुंचती है। हां, सूचना नहीं देने से भ्रष्टाचारियों को जरूर मदद पहुंचती है। अब साहब किसके साथ हैं यह भी वही बताएंगे।



