बिहार बजट : बड़े उधोगों के लिए इतना ज्यादा बढ़ा है निवेश, जानें….

प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित बड़ी औद्योगिक यूनिटों में वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में 16 गुना अधिक निवेश किया गया है।  इसी समयावधि के दौरान सभी तरह के उद्यमों में पांच गुना से अधिक निवेश हुआ है। इस बात का खुलासा बिहार आर्थिक सर्वेक्षण ने किया है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में सुखद बदलाव होने का संकेत माना जा सकता है। 2017 से 2021 के बीच राज्य को कुल 540761 करोड़ रुपये के 1918 निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए। सबसे अधिक इथेनाल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय उर्जा के क्षेत्र में प्रस्तावआये हैं।  इनमें दिसंबर 2021 तक इथेनाल को लेकर 159 इकाइयों को एनओसी दिया गया।

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के सभी तरह के उद्यमों में 2020-21 में कुल 1904.78 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 342. 50 करोड़ का निवेश हुआ था। निवेश के नजरिये से औद्योगिक विकास में सबसे ज्यादा सकारात्मक संकेत बड़े उद्योगों में देखे गये हैं।

वित्तीय वर्ष 2019-20 में बड़े उद्योगों में केवल 84.45 करोड़ का निवेश हुआ था। वित्तीय वर्ष 2020-21 में निवेश सोलह गुना अधिक बढ़ कर 1345.85 करोड़ हो गया। इसी समयावधि के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में 8263 लोगों को रोजगार भी मिला है।

बेशक सर्वाधिक निवेश बड़े औद्योगिक सेक्टर में हुआ हो, लेकिन सर्वेक्षण रिपोर्ट बताती है कि सर्वाधिक 3733 लोगों को रोजगार लघु उद्योगों ने दिया है।  इसके बाद मध्यम उद्योगों में 2651 और बड़े उद्योगों ने 1100 लोगों को रोजगार दिया। अति लघु उद्योगों में केवल 779 लोगों को रोजगार मिला है।

राज्य में निवेश फोर्ट फोलियो के लिहाज से उच्च प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण में ज्यादा निवेश हुआ है। वर्ष 2020-21 में खाद्य प्रसंस्करण में 1761.28 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। जो इससे पिछले के साल से दस गुना अधिक है।

वित्तीय 2019-20 में खाद्य प्रसंस्करण में 183 करोड़ का निवेश हुआ था. वस्त्र उद्योग के निवेश में भी सुधार हुआ है। हालांकि कोरोना के दुष्प्रभाव की वजह से सूचना प्रौद्योगिकी ,सक्षमित सेवा में कमी आयी। उल्लेखनीय है कि खाद्य प्रसंस्करण निवेश क्षेत्र में 5384 लोगों को रोजगार मिला।

औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति आने के बाद 2017 से दिसंबर 2021 तक आये प्रस्तावों में से 342 यूनिट शुरू हो चुकी हैं। इनके जरिये 10819 लोगों को रोजगार भी मिला है। कुल चालू इकाइयों के निवेश का 40 फीसदी खाद्य प्रसंस्करण में किया गया है। 2011-12 से 2018-19 के बीच कार्यशील पूंजी को छोड़ कर सभी औद्योगिक सूची में वृद्धि दर्ज की गयी है।

 

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