मुजफ्फरपुर। शहर के सदर अस्पताल में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के भले ही दावें किए जा रहे है लेकिन तस्वीर कुछ और ही है। इमरजेंसी में महिला कर्मी के बदले गैर प्रशिक्षित व गैर सरकारी अप्रशिक्षित कर्मी इंजेक्शन देते है। न रोस्टर है न बही है।
अपनी-अपनी पाली बांधकर चिकित्सक व कर्मी काम कर रहे हैं। कुछ इस तरह की घटना सामने आई। सीएस डा. वीरेंद्र कुमार जब औचक निरीक्षण को पहुंचे तो उनका माथा ठनका। इमरजेंसी में आए एक मरीज का उपचार करना पड़ा।
इमरजेंसी में डा.रंजन कुमार से वहां के इलाज के बारे में जानकारी ली। रोस्टर जब कर्मी दिखाने लगे तो कहा कि इस तरह से सदर अस्पताल नहीं चल सकता। उपाधीक्षक को निर्देश दिया कि सात दिन के अंदर रोस्टर दुरुस्त किया जाए।
हाजिरी का एक रजिस्टर हो जो इमरजेंसी में रहे। उसी तरह से एक रोस्टर रहना चाहिए। रोस्टर में इमरजेंसी से लेकर आउटडोर तक काम करने वाले का नाम व समय अंकित रहना चाहिए।
चार चिकित्सक व दस कर्मी अनुपस्थित मिले जिनकी हाजिरी काट दी गई। उनसे जवाब मांगा गया है। दो कर्मी ऐसे मिले जो 30 दिन से हाजिरी नहीं बनाए थे।
सदर अस्पताल में कई तरह की खामियां मिली है। इमरजेंसी व आउटडोर का रोस्टर कहीं दीवार या डाक्टर टेबल पर नहीं दिखा। एक जगह के बदले सात जगह पर हाजिरी बनाने की आई बात।
इमरजेंसी, आउटडोर, इंडोर, कंट्रोल रूम, उपाधीक्षक चैंबर में मिला अलग-अलग रजिस्टर। हाजिरी बही पर पी. कुमार, डी. कुमार, सी जैसे सांकेतिक लिखकर बन रहा हाजिरी, इससे पता नहीं चल पाया कि कौन आ रहा है और कौन किसके बदले कर रहा काम।
इमरजेंसी में एक भी महिला कर्मी का नाम रोस्टर में नहीं, इससे यहां पर मरीजों को परेशानी हो रही। इमरजेंसी में एएनएम व पारा मेडिकल कर्मी के बदले प्रशिक्षण लेने पहुंचे बाहरी दे रहा इंजेक्शन। हाजिरी बही पर चिकित्सक व कर्मी का नाम के साथ पदनाम व महीने का नहीं दिखा उल्लेख।
