बिहार में श’राब से बड़ी संख्या में हुई मौ’तों पर सरकार लगतार सफाई दे रही है। नीतीश सरकार के मंत्री लगातार इस मा’मले में लीपापोती करने में जुटे हैं। भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने ज’हरीली श’राब से हुई मौ’तों पर कहा कि यह सं’दिग्ध मौ’त का मा’मला है। यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ज’हरीली श’राब से मौ’त हुई है या नहीं।

उन्होंने कहा कि जहरीली श’राब से मौ’त की घ’टना जब-जब होती है, इसको श’राबबंदी कानून से जोड़ा जाता है। जिन राज्यों में श’राबबंदी कानून नहीं है वहां भी ज’हरीली श’राब से मौ’त होती है। इसलिए श’राबबंदी कानून से ज’हरीली श’राब से मौ’त की घ’टना को जोड़ना उचित नहीं है।

अशोक चौधरी ने कहा कि समाज के गं’दे लोग इस काम में लगे हुए हैं। वैसे लोग जो श’राब बनाते हैं उन्हें भी पता नहीं होता है कि श’राब ज’हरीली है। सरकार लोगों को जागरूक करने का लगातार प्रयास कर रही है। श’राबबंदी कानून पर न्यायालय पर टिप्पणी आ रही है। श’राबबंदी कानून भी लागू रहे और यह सही से पालन हो इसलिए श’राबबंदी कानून में संशोधन हो रहा है।

वहीं, बिहार पुलिस ने सोमवार को यह दावा किया कि होली के दौरान विभिन्न जिलों में हुई अधिकतर मौ’तों की वजह ज’हरीली श’राब नहीं बल्कि कुछ और भी हो सकती है। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बांका जिले में सबसे अधिक 10 लोगों की मौ’त होने की खबर है। इसे लेकर नि’षेध एवं उत्पाद शुल्क के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जिला मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट मांगी है।

बांका के जिलाधिकारी (डीएम) का कहना है कि प्रशासन द्वारा की जा रही जांच में पीड़ित परिवारों के सदस्यों के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी ने दावा किया है कि मृ’तकों ने श’राब का सेवन नहीं किया था और उनके ‘अनुरोध पर बिना पो’स्टमॉर्टम कराए श’वों को अंतिम संस्कार के लिए परिवारों को सौंप दिया गया।

