गया में 8वीं के स्टूडेंट की मौ’त की विसरा रिपोर्ट ने चौंका दिया है। मौ’त के ढाई महीने बाद आई रिपोर्ट में स’ल्फास खा’ने की बात कही गई है, जिससे अब कई सवाल उठने लगे हैं। स्कूल के अंदर बच्चे ने सल्फास कैसे खाया, इसका जवाब न जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल दे पा रहा है और न पुलिस।

बता दें, 16 जनवरी को 8वीं के छात्र कृष्ण चंद्र की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने इससे पल्ला झाड़ लिया था। विसरा रिपोर्ट पर उठते सवालों के बीच बच्चे के पिता प्रकाश चंद ने भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘इस मामले में बड़ा नक्सेस काम कर रहा है, जो रिपोर्ट की हेराफेरी कर रहा है। ताकि वह और उसका स्कूल अपनी करतूत को छिपा कर बेदाग शिक्षा के बाजार में खड़ा रह सके।’

उन्होंने पूछा, ‘ऐसे में हमें कैसे न्याय मिलेगा, अब समझ में नहीं आ रहा है। सल्फास से जुड़ा एक भी लक्षण नहीं दिखा है। जबकि, सल्फास बॉडी में जब जाता है तो फौरी तौर पर 100 लक्षण दिखने लगते हैं, लेकिन उस दिन तो ऐसी कोई बात ही नहीं थी।’

स्कूल के सीसीटीवी में 2:52 मिनट पर कृष्ण चंद्र अपने साथी के साथ स्कूल परिसर की सीढ़ियों से हंसते खेलते हुए उतरता दिख रहा था। यहां तक की स्कूल बस की ओर जाता हुआ भी दिख रहा था। इसके बाद ही कृष्ण चंद के साथ बड़ा हा’दसा हुआ था।

इधर पूरे मामले की जांच कर रहे एएसपी विधि व्यवस्था भरत सोनी ने बताया कि जो रिपोर्ट आई उस पर हम कुछ नहीं कह सकते। बावजूद इसके मामले का बेहतर ढंग से जांच और खुलासा हो सके इसे देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर बिसरा हैदराबाद एफएसल को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद देखते हैं कि जांच किस दिशा की ओर जाती है। पुलिस इस मसले को अब यूनिक केस मान कर जांच में जुटी है।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक आरोपी शिक्षक सुवेंदु की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यह भी अचरज की बात है। न तो पुलिस उसे गिरफ्तार रही है और न ही स्कूल प्रबंधन उसे पुलिस के समक्ष पेश कर रही है। जबकि घटना के तीन महीने अब होने को है। सब के सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और हमारा परिवार हर दिन बेटे के खोने की टीस से अंदर ही अंदर टूट रहा है। उन्होंने कहा कि हमें न्याय चाहिए।

साथ ही में यह भी कि आखिर हादसा कैसे हुआ। अगर इस बात की भी सही व तथ्यात्मक जानकारी मिल जाती है तो हम दिल को मना लेंगे लेकिन रिपोर्ट को मैनिपुलेट किया जाना ठीक नहीं है। यह हजम नहीं हो रहा है। यदि जरूरत पड़ी तो इसके विरुद्ध हम कोर्ट में हर संभव लड़ाई लड़ेंगे।