पटना। सरकारी नौकरी में अब मौज नहीं चलेगी। काम में कमजोर पड़ रहे सरकारी सेवकों को हटाने की प्रक्रिया जल्द तेज होगी। सरकार ने सभी विभागों को कहा है कि ऐसे सरकारी सेवकों की पहचान करने के लिए वह विभागीय समिति का गठन करें।
उन कर्मियों को सेवा से हटाने के लिए अपनी अनुशंसा सरकार को दें, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके। मुख्यालय के कार्यालयों के अलावा प्रमंडल एवं जिला स्तर पर भी ऐसी समितियां गठित होंगी। सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र के मुताबिक इस तरह का आदेश पहले भी दिया गया था।
लेकिन, अब तक विभाग को समितियों के गठन की जानकारी नहीं मिल सकी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने दो साल पहले 23 जुलाई 2020 को संकल्प जारी कर 50 साल से अधिक उम्र के ऐसे सरकारी सेवकों को हटाने का फैसला किया था, जो ढंग से कम नहीं कर रहे हैं।
ऐसे कर्मियों के कामकाज की आवधिक समीक्षा का आदेश दिया गया था। लेकिन, सरकार के विभागों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई। नतीजा, आदेश का कार्यान्वयन अभी तक नहीं हो सका। गजट के मुताबिक 50 की उम्र पार कर चुके ऐसे सरकारी सेवक काम से हटाए जाएंगे, जिनकी कार्यदक्षता संतोषप्रद नहीं है।
उन्हें सेवा में बनाए रखना लोकहित में नहीं है। यह उन कर्मियों पर लागू होगा, पहली नियुक्ति की तिथि से जिनकी सेवावधि 21 वर्ष पूरी हो चुकी है। बिहार सेवा संहिता में भी इसका प्रविधान है। इसके मुताबिक सरकारी सेवा से हटाए गए कर्मियों को तीन महीने की नोटिस या तीन महीने का वेतन दिया जाएगा।

फिलहाल क, ख, ग और अवर्गीकृत समूह के कर्मियों को समीक्षा के दायरे में रखा गया है। समूह क के कर्मियों की समीक्षा अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिक की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी। अपर सचिव या संयुक्त सचिव की अध्यक्षता वाली समिति समूह ख के सेवकों के बारे में निर्णय लेगी। समूह ग एवं अवर्गीकृत कर्मियों के बारे में निर्णय लेने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।
