बारिश से थमी जंगल में आ’ग की घ’टनाएं, जानें क्या हैं मामला?

पश्चिम पंचारण। इस फायर सीजन में मौसम की वजह से वन विभाग को बड़ी राहत मिली है। अप्रैल माह में वीटीआर में आ’ग लगने की घ’टनाएं अपने चरम पर होती हैं। 15 फरवरी से 15 जून तक होने वाले फायर सीजन में हर वर्ष कई हेक्टेयर जंगल आ’ग की भेंट चढ़ जाते हैं। वन विभाग को वन संपदा का नु’कसान उठाना पड़ता है।

लेकिन इस बार अप्रैल माह में वन विभाग चैन की सांस ले रहा है। मौसम में बदलाव के चलते बारिश होना इसका मुख्य कारण है। बारिश के चलते जहां जंगल की आ’ग बुझ गई है। वन विभाग के अधिकारी भी इसे मौसम की मेहरबानी मान रहे हैं। हालांकि विभाग आगे के लिए अ’लर्ट मोड़ पर है। इस वर्ष मौसम के चलते जहां वनाग्नि को रोकने में मदद मिली है। वहीं ये वन विभाग के लिए भी राहत की बात है।

वीटीआर के आसपास के वन्य क्षेत्र में आ’ग लगने की घ’टनाओं में भारी कमी दर्ज की गई है। बारिश ने लाखों रुपये की वन संपदा को नुकसान से बचाया है। वीटीआर का वन क्षेत्र लगभग 900 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। हर साल गर्मियों के मौसम में जंगल में आग लगने की संभावना बनी रहती है।

ऐसा नहीं है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास नहीं होते। वन विभाग की टीमें गर्मियों से पहले रणनीति बना कर अमल शुरू कर देती हैं और फायर लाइन एरिया भी साफ किया जाता है। कुछ हद तक प्रयास सफल भी रहता है। इस बार तो वन विभाग के प्रयास के बावजूद जंगल में अगलगी की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके कारण जंगल की बेशकीमती वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग की घटनाओं के कारण धुएं के गुबार के साथ-साथ तापमान में भी भारी वृद्धि दर्ज होती है। लेकिन झमाझम बारिश ने मौसम सुहाना कर दिया है।

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