पटना। पेट्रोल-डीजल की कीमत सात दिनों से स्थिर रहने के कारण लोगों के लिए राहत है। सरकारी तेल कंपनियों ने कीमत जारी करते हुए पुरानी दर ही बरकरार रखी है। बुधवार को सातवें दिन जब पेट्रोल-डीजल के भाव स्थिर हैं। इधर 22 मार्च से छह अप्रैल के बीच तक करीब 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि ने महंगाई को पंख लगा दिया है। हर सामान के दाम काफी बढ़ गए हैं।
22 मार्च को इस वर्ष पहली बार तेल की कीमतें बढ़ीं। लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ रही कीमतों से परेशान थे इस बीच एलपीजी सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए गए। पहले घरेलू एलपीजी और फिर कामर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ गईं। हालांकि, बढ़े दाम का सिलसिला पेट्रोल और एलपीजी तक ही सीमित नहीं रहा। इसके बाद सीएनजी-पीएनजी के तेवर भी तीखे हो गए। 22 मार्च से छह अप्रैल के बीच 24 मार्च और एक अप्रैल को पेट्रोे पदार्थों के भाव नहीं बढ़े।
उसके बाद लगातार कीमत में कभी 70 पैसे तो कभी एक रुपये तक का इजाफा किया जाता रहा। बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को एक लीटर पेट्रोल 116 रुपये 79 पैसे तो डीजल 101 रुपये 59 पैसे में मिल रहा है। भागलपुर में 117.01 रुपये और 101 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर की दर से पेट्रोल और डीजल की बिक्री हो रही है।
बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही वृद्धि का असर आमजन पर पड़ने लगा है। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने की बात कहते हुए सामान के भाव बढ़ा दिए गए हैं। स्थिति ऐसी है कि नींबू का भाव दस रुपय प्रति पीस पहुंच गया है। इस बीच बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने कहा है कि कीमत बढ़ने के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने से ही कीमत में उतार-चढ़ाव होता है। राज्य सरकार की नजर बनी हुई है।


