हिन्दुओं का ऐसा गांव जहां समूह में पकड़ते मछली, एक घर मुस्लिम को मिलता है हिस्सा, जानें विस्तार से…

शेखपुरा : जिले के बरबीघा प्रखंड के सर्वा गांव में सामाजिक सहभागिता और सह अस्तित्व की परंपरा दशकों से चली आ रही है। यहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी ग्रामीण सामूहिक रूप से मछली का बंटवारा करते हैं। इससे पहले मछली भी मिलकर ही पकड़ते हैं। गांव हिन्दुओं का है, एकमात्र घर मुस्लिम का है। सहृदयता और मिल्लत ऐसी कि एक घर वाले मुस्लिम को भी ईमानदारी से हिस्सा देते हैं। मो. आफताब आलम बताते हैं कि वे सपरिवार मछली पकड़ने के लिए जुटते हैं। इसके बाद उन्हें भी उसका हिस्सा मिलता है। खूबी यह कि मछलियां बेची नहीं जाती। सभी परिवार व इष्ट मित्रों संग मिल-बांटकर खा लेते हैं।

गांव के आहर से मछली पकड़ने की दशकों पूर्व से बनी व्यवस्था का सभी यहां पालन करते हैं। ग्रामीण युवक अभिजीत कुमार बताते हैं कि यहां ऐसी परंपरा दशकों से चली आ रही है। गांव में तीन सौ बीघे के आहर में मछली पालन किया जाता है।

यहां बगैर गांव की अनुमति के एक मछली भी कोई नहीं मार सकता है। मछली तैयार होने पर ग्रामीणों की सामूहिक बैठक में मछली पकडऩे का दिन तय होता है। उस दिन सभी मिलकर आहर से मछली निकालते हैं। किसी ने अगर बिना अनुमति के मछली निकाल लिया तो उसपर पांच सौ जुर्माना लगाया जाता है।

गांव में ढोल बजा कर इसकी जानकारी दी जाती है। ग्रामीण विजय सिंह के अनुसार पहले आहर का पानी सुखाया जाता है। फिर मछली को एक जगह जमा किया जाता है। फिर अलग-अलग हिस्सा लगाया जाता है। मछली को इस तरह से जमा करने को गाढ़ लगाना कहते हैं। फिर 21 गाढ़ से सभी को हिस्सा निकालकर दिया जाता है। सभी जाति के लोगों के लिए हिस्सा निकलता है। उसके हिस्से की मछली उसे दे दी जाती है।

गांव में भूमिहार, यादव, महतो, पासवान, रविदास, कहार, पंडित, कुम्हार, पासी सहित एक दर्जन जाति के लोग रहते हैं। ग्रामीण रंजीत कुमार बताते हैं कि 21 लोगों की जमीन इस 300 बीघा के आहर में होने की वजह से 21 गाढ़ (हिस्सा) लगता है। बाद में पकड़ी गई मछली को सभी जाति-धर्म के लोगों के बीच बांटने की परंपरा बन गई। सद्भावना दिखाते हुए पंचायत के दूसरे गांवों में भी मछली बांटी जाती है।

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