मुजफ्फरपुर। जिले में एईएस पीड़ित बच्चों के रहन-सहन के बारे में पता लगाने के लिए पटना एम्स की टीम पहुंची है। इस दौरान पीकू वार्ड में इलाजरत बच्चों को देखने तथा इलाज के प्रोटोकाल के बारे में जानकारी भी ली गई। टीम का नेतृत्व कर रहे पटना एम्स के डा. सीएन सिंह ने कहा कि एईएस से प्रभावित प्रखंडों में पीड़ित बच्चों के घर व उसके रहन-सहन का सर्वे कराया जाएगा।
इसके साथ ही विशेषज्ञों ने एईएस के बदले तीन नाम इंसेफेलोपैथी, प्री मानसून इंसेफेलोपैथी व हीट स्ट्रेस प्रस्तावित किए हैं। इसके लिए रिसर्च टीम गांव में जाकर इसका अध्ययन करेगी। साथ ही बीमारी का कारण उमस है या अन्य, इसपर भी रिसर्च किया जाएगा।
एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा. गोपाल शंकर सहनी ने कहा कि उमस के कारण बच्चे के शरीर में माइटोकोंड्रिया प्रभावित होने लगती है, जिससे शरीर में ग्लूकोज कम होने लगता है। इन पर टीम शोध करेगी।
अप्रैल, मई व जून में जो गर्मी होती है, उसमें बच्चे बीमार हो रहे हैं, लेकिन ऐसी ही गर्मी बरसात के बाद निकलने वाली धूप में भी होती है। उस वक्त बच्चों में चमकी तेज बुखार होता है या नहीं, अगर होता है तो उस वक्त उनके दिमाग की स्थिति क्या होती है, इस पर भी टीम शोध होगी।
वहीं एसकेएमसीएच के अधीक्षक डा.बीएस झा ने कहा कि एसकेएमसीएच में पटना एम्स की आठ सदस्यीय टीम पहुंची। टीम ने पीकू में भर्ती बच्चों के लक्षण व उनके इलाज की जानकारी ली।
