उत्तर बिहार के आलू एवं गेहूं के निर्यात से न सिर्फ श्रीलंका-बांग्लादेश में महंगाई की समस्या का समाधान हो सकता है, बल्कि इससे बिहार के किसानों को भी उनकी फसल का भरपूर दाम मिल सकेगा। श्रीलंका में बेतहाशा महंगाई के कारण गेहूं व आलू 200-200 रुपए तक किलो बिक रहा है। वहीं, आटा 250 रुपए किलो तक बिक रहा है। गेहूं के सीजन में बाढ़ आने के कारण बांग्लादेश पूरी तरह आयातित गेहूं पर निर्भर हो गया है।

वहां भारतीय गेहूं की अत्यधिक डिमांड है। इधर, उत्तर बिहार में इस साल आलू व गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। फसल रखने की जगह नहीं होने से लागत निकालने के लिए किसान एमएसपी से कम कीमत पर व्यापारियों के हाथों गेहूं बेच रहे हैं। वहीं, उत्तर बिहार के सभी कोल्ड स्टोरेज पहले से ही बुक हैं। कोल्ड स्टोरेज में तो अब और आलू रखने की जगह नहीं बची है।

ऐसे में किसानों के समक्ष इस भीषण गर्मी में आलू को बचाए रखने का संकट है। वर्तमान हालत में उत्तर बिहार से श्रीलंका को गेहूं व आलू और बांग्लादेश को गेहूं का निर्यात किया जाए तो आलू ताे खराब हाेने से बचेगा ही, साथ ही उत्तर बिहार के किसानों को गेहूं की कीमत भी वर्तमान में मिल रही कीमत से 200 रुपए प्रति क्विंटल तक अधिक मिलेगी।
बंपर पैदावार… गेहूं की कीमत भी 200 रु. क्विंटल तक अधिक मिलेगी, इस साल उत्तर बिहार में गेहूं-आलू की अच्छी ऊपज
व्यापारी बोले- कम भाव पर बेच कर लागत निकाल रहे किसान
आलू व्यवसायी नवीन कुमार चौधरी ने बताया कि 20 दिन पहले यहां से पश्चिम बंगाल के व्यापारी भी आलू मंगवा रहे थे। लेकिन, अब वहां का आलू निकलने से बंगाल में मांग नहीं है। वहीं, गेहूं व्यापारी जीतेन्द्र चौधरी ने बताया कि बाजार समिति में अभी किसानों से 1930 रुपए क्विंटल गेहूं की खरीद हाे रही है। आगे कीमत और कम होगी। इसलिए किसान कम कीमत पर अपनी फसल बेच रहे हैं।

पूंजी डूबने का खतरा… किसानों के घरों में पड़ा है 300 क्विंटल आलू
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के किसानों के घर में अभी 300 क्विंटल तक आलू पड़ा है। अगर इसकी बिक्री नहीं हुई या कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा गया ताे भीषण गर्मी में ज्यादा दिनोें तक आलू नहीं टिक पाएगा। इससे किसानों की लागत निकलना तो दूर उनकी पूंजी भी डूबने का खतरा है। ऐसे में मजबूरी में किसान 7-9 रुपए प्रति किलो अपना आलू बेच कर लागत निकाल रहे हैं।
गिरेगा गेहूं का रेट… घाटे से बचने के लिए व्यापारियों को बेच रहे किसान
मुजफ्फरपुर बाजार समिति से अभी प्रतिदिन 50 ट्रक गेहूं सिलिगुड़ी, गुवाहाटी समेत पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व गुजरात भेजा जा रहा है। वो भी सरकार से निर्धारित एमएसपी 2015 रुपए से 85 रुपए कम 1930 रुपए प्रति क्विंटल के रेट पर। आगे इसमें 30 रुपए प्रति क्विंटल और कमी आने की संभावना है। इसको देखते हुए घाटे से बचने के लिए किसान व्यापारियों के हाथों गेहूं बेच रहे हैं।

प्रति मालगाड़ी नारायणपुर अनंत से 28.35 लाख खर्च
वर्तमान समय यूपी के बरेली से मालगाड़ी से गेहूं बांग्लादेश के दर्शनिया भेजा जा रहा है। बरेली से एक मालगाड़ी गेहूं भेजने का किराया 56.58 लाख लगता है। अगर यही गेहूं मुजफ्फरपुर के नारायणपुर अनंत टर्मिनल से भेजा जाए तो प्रति मालगाड़ी 28.35 लाख किराया(जीएसटी समेत) लगेगा। जो कि बरेली के मुकाबले आधा है। हालांकि, भेजने से पहले इसकी अनुमति लेनी होती है। (जैसा कि नारायणपुर अनंत रैक प्वॉइंट के मालबाबू संजीत किशोर ने बताया)
सूबे में गेहूं की पैदावार 76 लाख टन, खरीद महज 10 लाख टन होगी
जिला सहकारिता अधिकारी वीरेंद्र शर्मा के अनुसार, इस साल राज्य में 76 लाख 37 हजार 748 टन गेहूं के पैदावार का अनुमान है। जिसमें 10 लाख टन सरकारी खरीद का लक्ष्य है।

अभी तमिलनाडु के रास्ते श्रीलंका तक नाम मात्र का भेजा जा रहा आलू
आलू काे श्रीलंका भेजने के लिए सड़क मार्ग से पहले तमिलनाडु भेजना हाेगा। लेकिन, इस पर अधिक भाड़ा लगेगा। पश्चिम बंगाल से जलमार्ग से श्रीलंका भेजने में कम भाड़ा खर्च करना हाेगा।