मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पांच वर्ष पूर्व हुई इंटरनल ऑडिट की फाइल ही दबा दी गई। विश्वविद्यालय स्तर पर हुई वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 की ऑडिट में विवि के कई विभागों और करीब डेढ़ दर्जन कॉलेजों में वित्तीय अ’नियमितता की जानकारी दी गई थी। साथ ही उस रिपोर्ट में बताया गया था कि विभाग व कालेजों ने विभागीय नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया है।
कई मामलों में भुगतान के साक्ष्य भी कालेजों की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए। वित्तीय अ’नियमितता की ओर इशारा करते हुए फाइल आगे बढ़ाई गई, लेकिन वित्त पदाधिकारी के स्तर से ही यह द’ब गई। इसके बाद भी कई बार मामले को लेकर आडिट विभाग ने प्रयास किया तो फाइल वापस लौटा दी गई।
वहीं सत्र 2018-19, 2019-20 और 2020-21 की इंटरनल आडिट के लिए बढ़ाई गई फाइल पर वरीय पदाधिकारियों की ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। विवि की ओर से इंटरनल आडिट में गड़बड़ी की जानकारी पदाधिकारियों को देने के बाद कॉलेजों ने अगले सत्र से अपने स्तर से ऑडिट करना शुरू कर दिया। इस सत्र के बाद से कालेजों की ओर से स्वयं ऑडिट कराकर फाइल विवि को भेज दी जाती है।
विवि की ओर से उसे आगे बढ़ाया जाता है। विवि के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इन फाइलों में बड़े पैमाने पर ग’ड़बड़ी रहती है। इसके बाद भी विवि इसे स्वीकृत कर लेती है। इंटरनल ऑडिट की फाइल दबाने के मामले में जब विवि के वित्त पदाधिकारी विनोद कुमार से मोबाइल पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी अवकाश पर मुख्यालय से बाहर हैं।
फाइल देखने के बाद बता पाएंगे कि फाइल किस कारण आगे नहीं बढ़ी। वहीं कुलसचिव डॉ.आरके ठाकुर के मोबाइल पर दो बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। उन्होंने फोन नहीं उठाया।
