रूसी कंपनी में हिस्‍सेदारी खरीद सकती हैं भारतीय तेल कंपनियां

भारत ने सरकारी ऊर्जा कंपनियों से प्रतिबंधों से प्रभावित रूसी फर्म रोसनेफ्ट में यूरोपीय तेल प्रमुख बीपी की हिस्सेदारी खरीदने की संभावना का मूल्यांकन करने को कहा है। बीपी ने घोषणा की है कि वह रोसनेफ्ट में अपनी 19.75% हिस्सेदारी बेच रही है।

सूत्रों ने कहा कि तेल मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल), इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीआरएल), हिंदुस्तान पर्टोलियम की सहायक कंपनी प्राइज पेट्रोलियम लिमिटेड, ऑयल इंडिया लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड को अपनी मंशा से अवगत कराया है।

भारतीय कंपनियों और तेल मंत्रालय ने रॉयटर्स के ईमेल का जवाब नहीं दिया है। पश्चिमी देशों ने यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं जबकि भारत ने मास्को की कार्रवाई की साफ तौर से निंदा नहीं की है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता, भारत अपनी 5 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है।

मार्च में बीपी के सीईओ बर्नार्ड लूनी ने भारतीय तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। इसके बाद ही रोसनेफ्ट में हिस्सेदारी खरीदने की चर्चा शुरू हुई। तेल मंत्रालय ने तेल और प्राकृतिक गैस कॉर्प की विदेशी निवेश शाखा ओवीएल को रूस के सुदूर पूर्व में सखालिन 1 परियोजना में एक्सॉन मोबाइल कॉर्प की 30% हिस्सेदारी खरीदने पर विचार करने के लिए भी कहा।

एक्सॉन परियोजना का संचालक है। ओवीएल के पास पहले से ही इस परियोजना में 20% हिस्सेदारी है। एक्सॉन ने 1 मार्च को कहा था कि वह लगभग 4 बिलियन डॉलर के एसेट को बेचेगा और सखालिन 1 सहित अपने सभी रूसी संचालन को बंद कर देगा। ओवीएल की वेस्ट साइबेरियन बेसिन में वेंकोर फील्ड के मालिक वेंकोरनेफ्ट में भी 26% हिस्सेदारी है।

 

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