समस्तीपुर। पुलिस या पीड़ित को इंजरी रिपोर्ट लेने के लिए भागदौड़ नहीं करनी होगी। केस के आइओ क्षण भर में एप से इंज्यूरी रिपोर्ट देख सकेंगे। रिपोर्ट के आधार पर आ’रोपित पर धारा लगा सकेंगे तथा दु’र्घटना में घायल या मृ’तक के मुआवजे की अनुशंसा कर सकेंगे।
इंजरी रिपोर्ट इंफारमेशन सिस्टम नाम से बने एप को समस्तीपुर में मई में ही लांच किया जाएगा। पुलिस व पीड़ित दोनों को सहूलियत देने वाले इस एप में चार विभिन्न स्तरों से इसके क्रियान्वयन व अनुश्रवण की व्यवस्था की गई है। डीएम ने इसकी अनुमति दे दी है। चिकित्सकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। नालंदा के बाद समस्तीपुर दूसरा जिला होगा जहां इस तरह की व्यवस्था होगी।

जिलास्तरीय एडमिन ही इसके जरूरी यूजर बनाएंगे। अस्पताल स्तर पर एडमिन सभी संबंधित पीएचसी के चिकित्सकों को यूजर के रूप में उनके मोबाइल नंबर को निबंधित करेंगे।
चिकित्सक घटना-दुर्घटना में घायल अंगों की फोटो उसके या उसके अभिभावक की सहमति से लेकर इस एप में अपलोड करेंगे। अन्य आवश्यक जानकारियां भी एप में रहेंगी। एक निजी कंपनी द्वारा बनाए गए इंज्यूरी रिपोर्ट इंफारमेशन सिस्टम नाम से बने एप को मुख्यमंत्री द्वारा भी देखा जा चुका है।
उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे नालंदा में इसकी प्रक्रिया शुरू हुई थी। उस समय वहां के जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ही थे। डीएम के निर्देश के आलोक में सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक विश्वजीत रामानंद को जिलास्तरीय एडमिन बनाया गया है। अस्पताल प्रबंधक जिले के सभी चिकित्सकों का यूजर आईडी तैयार कर रहे है। जिले में कुल 250 से अधिक चिकित्सकों की सूची तैयार की गई है। सभी का एप में नाम, मोबाइल नंबर और पदस्थापित स्वास्थ्य संस्थान दर्ज किया जा रहा है। जिसके आधार पर यूजर आईडी व पासवर्ड भी तैयार होगी। पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी जांच के उपरांत ही यूजर आईडी एवं पासवर्ड से उपयोग किया जा सकेगा।
