मुजफ्फरपुर : जिले में कमजोर व जर्जर तटबंधों से बाढ़ से बचाव कैसे होगा। बताया जाता है कि मानसून नजदीक है, लेकिन कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां के लोग मानसून की आहट से चिंतित है। कारण यह है कि इन इलाकों में बाढ़ का पानी घुसकर भारी नुकसान पहुंचाता है। जिले में बहने वाली छोटी-बड़ी चार नदियों के तटबंध 37 स्थानों पर जर्जर हैं। तटबंध की मरम्मत की जगह बाढ़ से बचने के लिए बालू भरी बोरी तैयार कर रखी गई है।
विभाग ने जिला प्रशासन को जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक मानसून में समय बाकी होने के बावजूद इन तटबंधों के नाजुक स्थलों की मरम्मत की कोई तैयारी नहीं है। जल निस्सरण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने जिला प्रशासन को तटबंध के नाजुक स्थलों की सूची सौंपी है। विशेषज्ञों की टीम के निरीक्षण के बाद यह सूची बनाई है।
गायघाट में बागमती बेनीबाद कन्या उर्दू मध्य विद्यालय के पास, फतेहपुर, धर्माकोठी, जगनिया, बलौर महादलित टोला, बलौर निधि सती स्थल, नाजिरपुर के पास भगवतपुर महादलित टोला भटगामा मस्जिद, भटगामा रिंग बांध, चांदपुरा, गोरियाही पागा व बदेया जमींदारी बांध के पास बेहद नाजुक स्थिति में है।
यदि तटबंध के इन इलाकों में पानी जमा होता है तो तटबंध को बचाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं साहेबगंज में राजारामपुर के पास झाझा नदी, पारू के चोचाही में वाया, वाजिदपुर में झाझा, झाझा नदी के बसरा, वाया नदी में वभनगामा, सरैया, मलाही, चकरोटी, साहेबगंज में मकड़ी टोला, बेलकाटी, पारू में बन्नी दुबौली,
साहेबगंज में हुस्सेपुर व जगदीशपुर, पारू में मिश्रौलिया, सरैया में गिजास, जैतपुर व वाया डीह व पारू में रघुनाथपुर में तटबंध नाजुक बना हुआ है। इन स्थलों पर मरम्मती के बजाए इस बार बालू भरे बोरे से काम चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विभाग ने कुल 3.80 लाख बोरे तैयार कराए है।
